
Tunnel Accident Update Chamoli: उत्तराखंड के चमोली जिले में गुरुवार शाम निर्माणाधीन सुरंग में अचानक पानी घुसने और भूस्खलन होने से बड़ा हादसा हो गया। अलकनंदा नदी पर बन रही 444 मेगावाट की विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की टनल में हुए इस हादसे में कई श्रमिक मलबे और पानी के बीच फंस गए। हादसे में 7 श्रमिकों की मौत की सूचना है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। हादसे के बाद NDRF, SDRF, पुलिस, जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन, ITBP और सेना की टीमें राहत एवं बचाव अभियान में जुट गईं। सुरंग के भीतर पानी और दलदल की स्थिति के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी मुश्किलें सामने आईं। इस बीच उत्तराखंड के CM पुष्कर सिंह धामी ने अस्पताल पहुंचकर घायलों से मुलाकात की।
CM धामी ने एक घायल से मुलाकात करते हुए उससे कहा, ''घर कहां है, ठीक हो, दर्द तो नहीं हो रहा और?', मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हादसे को गंभीरता से लेते हुए राहत और बचाव कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सुरंग में फंसे प्रत्येक व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालना सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि NDRF और SDRF की टीमों को घटनास्थल पर भेजा गया है। जिला प्रशासन और संबंधित एजेंसियों को तत्काल राहत एवं बचाव कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि रेस्क्यू किए गए श्रमिकों के इलाज में किसी तरह की कमी नहीं होने दी जाएगी।
बताया जा रहा है कि हादसा गुरुवार शाम करीब 7 बजे हुआ। करीब 3.5 किलोमीटर लंबी सुरंग में लगभग 1.8 किलोमीटर अंदर श्रमिक काम कर रहे थे। इसी दौरान अचानक तेज आवाज के साथ सुरंग के भीतर पानी और भारी मलबा आने लगा। अचानक हुए इस घटनाक्रम से सुरंग के अंदर मौजूद श्रमिकों में अफरातफरी मच गई। मलबे और पानी के कारण कई मजदूर अंदर ही फंस गए। घटना की सूचना मिलते ही राहत और बचाव दलों को मौके पर भेजा गया।
हादसे में अब तक 7 श्रमिकों की मौत की सूचना सामने आई है। वहीं, 13 मजदूर घायल बताए जा रहे हैं। घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। इनमें 10 का इलाज जिला अस्पताल गोपेश्वर में चल रहा है, जबकि अन्य घायलों को श्रीनगर और पीपलकोटी में उपचार दिया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, कई घायल श्रमिकों की हालत गंभीर बनी हुई है। हादसे में प्रभावित अधिकांश मजदूर बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ के रहने वाले बताए जा रहे हैं।
हादसे के बाद शुरू किए गए रेस्क्यू ऑपरेशन में अब तक 22 श्रमिकों को सुरंग से बाहर निकाले जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं, 6 श्रमिकों की तलाश जारी बताई जा रही है। सुरंग के भीतर पानी, मलबे और दलदल की स्थिति के कारण बचाव दलों को काफी सावधानी के साथ अभियान चलाना पड़ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए उपलब्ध सभी संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
जिस सुरंग में हादसा हुआ, वह विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना का हिस्सा है। अलकनंदा नदी पर बन रही इस परियोजना की क्षमता 444 मेगावाट है और इसका करीब 70 प्रतिशत काम पूरा होने की बात कही जा रही है। हादसे के वक्त सुरंग के भीतर ग्रेविटी पर पैकिंग का काम चल रहा था। इसी दौरान अचानक पानी का दबाव बढ़ा और मलबा सुरंग के अंदर आने लगा।
हादसे के बाद NDRF और SDRF की टीमों ने मौके पर पहुंचकर बचाव अभियान शुरू किया। NDRF टीम के कमांडर अमृत लाल मीणा के मुताबिक, सुरंग के अंदर काफी मात्रा में पानी भर गया था। इसके अलावा किनारों से भी लगातार पानी रिस रहा था। पानी और दलदल के कारण सुरंग के भीतर पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो गया। बचाव दलों ने विशेष उपकरणों की मदद से फंसे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया। सुरंग के अंदर ऑक्सीजन की कमी और पानी व दलदल की स्थिति को देखते हुए रात में कुछ समय के लिए रेस्क्यू अभियान रोकना पड़ा।
हादसे की जानकारी मिलते ही NDRF, SDRF, पुलिस, जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें घटनास्थल पर पहुंच गईं। ITBP और सेना के जवान भी राहत एवं बचाव अभियान में लगाए गए हैं। निर्माण कंपनी एचसीसी के अधिकारियों से सूचना मिलने के बाद रेस्क्यू टीमों ने तत्काल काम शुरू कर दिया था। अधिकारियों की निगरानी में सुरंग के भीतर फंसे श्रमिकों तक पहुंचने और उन्हें बाहर निकालने का प्रयास जारी है।
हादसे के बाद टीएचडीसी मुख्यालय में भी अधिकारियों के बीच गतिविधियां तेज हो गई हैं। शुक्रवार को टीएचडीसी के सीएमडी सिपन कुमार गर्ग के साथ एक तकनीकी टीम दिल्ली से घटनास्थल पर पहुंचने की जानकारी दी गई है। कुछ टीएचडीसी कर्मचारियों के भी सुरंग के अंदर फंसे होने की आशंका जताई गई है। तकनीकी टीम के मौके पर पहुंचने के बाद सुरंग की स्थिति का आकलन कर बचाव अभियान को और प्रभावी बनाने की कोशिश की जाएगी।
परियोजना निदेशक शरद कुमार ने कहा कि इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता सुरंग में फंसे सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। इसके लिए सभी उपलब्ध संसाधनों को लगाया गया है। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। हादसे की विस्तृत जांच भी कराई जाएगी, ताकि घटना के कारणों का पता लगाया जा सके। अधिकारियों के मुताबिक, सुरंग में अचानक अधिक मात्रा में पानी आने के बाद मलबा भरने की स्थिति बनी।
फिलहाल राहत और बचाव अभियान पर पूरा ध्यान केंद्रित किया गया है। सुरंग के भीतर पानी और मलबे की स्थिति सामान्य होने के बाद हादसे के तकनीकी कारणों की विस्तृत जांच की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान श्रमिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। बचाव दल लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और फंसे हुए श्रमिकों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश जारी है।