देहरादून

होमगार्ड में वर्दी घोटाला : अफसरों और ठेकेदारों के गठजोड़ से तीगुने दाम में खरीदा सामान, जांच शुरू   

Uniform Scam : होमगार्ड विभाग में वर्दी घोटाला सामने आया है। अफसरों ने ठेकेदारों से मिलीभगत कर एक करोड़ के सामान का तीन करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया। डीजी ने मामला पकड़ते हुए आरोपी डिप्टी कमांडेंट के खिलाफ केस दर्ज करने के संबंध में शासन को रिपोर्ट भेज दी है। वर्दी घोटाला सामने आने से हड़कंप मचा हुआ है।
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Jan 20, 2026
A uniform scam has been uncovered in the Home Guard department
उत्तराखंड होमगार्ड विभाग में वर्दी घोटाला उजागर हुआ है

Uniform Scam : होमगार्ड विभाग में वर्दी घोटाले का मामला सामने आने से शासन में भी खलबली मची हुई है। उत्तराखंड होमगार्ड विभाग में दो करोड़ रुपये के वर्दी घपले का खुलासा हुआ है। जवानों के लिए एक करोड़ रुपये की वर्दी तीन करोड़ रुपये में खरीदी गई। यह घोटाला वित्तीय वर्ष 2024-25 में हुआ है। वर्ष 2025-26 में फिर इस रेट पर टेंडर निकाला गया। तब विभाग में तैनात नए डीजी पीवीके प्रसाद ने यह घपला पकड़ लिया। डीजी ने टेंडर निरस्त कराते हुए घपले के आरोपी डिप्टी कमांडेंट जनरल (डीसीजी) अमिताभ श्रीवास्तव के खिलाफ केस दर्ज कराने, दो करोड़ रुपये की रिकवरी करने और सेवा से बर्खास्त करने की रिपोर्ट शासन को भेजी है। अब शासन इस पर निर्णय लेगा। विभागीय जांच में सामने आया है कि डीसीजी अमिताभ श्रीवास्तव ने ठेकेदार के साथ मिलीभगत कर बाजार भाव से तीन गुना दामों पर सामान की खरीद की। इस घोटाले के सामने आने के बाद डीजी ने विभाग में वर्दी की खरीद पर रोक लगा दी है।

महंगे रेट पर निकाला टेंडर

होमगार्ड वदी घोटाले के लिए वर्ष 2025-26 के लिए भी उसी पुराने और महंगे रेट पर टेंडर निकाला गया तो नए डीजी को शक हुआ। उन्होंने तत्काल प्रभाव से टेंडर प्रक्रिया रद कर दी और विभागीय जांच के आदेश दिए। जांच रिपोर्ट में दो करोड़ रुपये के गबन की बात सामने आई है। डीजी ने अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी है। इस पर जल्द फैसला लिया जा सकता है। उधर, विभाग में अब वर्दी खरीद की प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए जवानों को सीधे वर्दी भत्ता देने की प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी।

500 का जूता 1500 में खरीदा

होमगार्ड विभाग में वर्दी घोटाले की परतें खुलने पर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। अधिकारियों और ठेकेदार के गठजोड़ ने एक करोड़ के सामान का बिल तीन करोड़ रुपये बनाया। इसमें 2024-25 के रेट पर ही टेंडर जारी किया गया था। 130 रुपये का डंडे की कीमत 375, 500 रुपये जूते की कीमत 1500 रुपये, 1200 रुपये की पेंट-शर्ट 3000 रुपये और 500 रुपये की जैकेट 1580 रुपये में खरीदी गई। डीजी ने जब बाजार भाव और टेंडर के रेट में जमीन- आसमान का अंतर देखा तो उनका माथा ठनका। उन्होंने तुरंत जांच टीम गठित की। टीम ने जब बाजार से कोटेशन लिए तो पता चला कि विभाग में हर सामान करीब तीन गुना दाम पर खरीदा जा रहा था।

Updated on:
20 Jan 2026 08:17 am
Published on:
20 Jan 2026 08:14 am