
मानसून की बदली चाल, कहीं ज्यादा तो कहीं कम बारिश (फोटो सोर्स-ANI)
Uttarakhand Rain Alert: उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर पहाड़ों पर भारी पड़ता नजर आ रहा है। कुमाऊं के कई इलाकों में तेज बारिश का दौर जारी है, जबकि मौसम विभाग ने देहरादून, नैनीताल समेत नौ जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। लगातार बारिश से प्रदेश में 102 सड़कें बंद हैं और संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन, चट्टान गिरने और नदी-नालों के उफान का खतरा बना हुआ है।
22 अगस्त को देहरादून, टिहरी, चंपावत, पिथौरागढ़, बागेश्वर, नैनीताल, रुद्रप्रयाग, चमोली और पौड़ी में भारी बारिश का अनुमान है। 23 अगस्त को देहरादून, टिहरी, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में भारी वर्षा हो सकती है। 24 अगस्त को देहरादून, नैनीताल और बागेश्वर में भारी बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने 22 से 25 अगस्त के बीच संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, चट्टान गिरने, सड़क और हाईवे बंद होने, नदी-नालों के उफान और निचले इलाकों में जलभराव का खतरा बताया है।
पिछले 24 घंटे में पिथौरागढ़ के तेजम में सबसे ज्यादा 104 मिमी बारिश दर्ज हुई। बंगापानी में 96, धारचूला में 37.8, मुनस्यारी में 28.2, डीडीहाट में 20.8 और थल में 20 मिमी बारिश हुई। विकासनगर में 60.5, नरेंद्रनगर में 57.5 और ऊखीमठ में 57 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। इस दौरान मौसम विभाग ने नाउकास्ट के जरिए चार ऑरेंज और 11 येलो अलर्ट जारी किए। हालांकि कोई रेड अलर्ट जारी नहीं किया गया।
लगातार बारिश का असर सड़क यातायात पर भी पड़ा है। धारचूला-तवाघाट राष्ट्रीय राजमार्ग पर कूलागाड़ में पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण आवाजाही बंद है। तवाघाट-गुंजी राष्ट्रीय राजमार्ग भी 61वें किलोमीटर पर बंद है। थल-मुनस्यारी राज्य मार्ग 164वें और 166वें किलोमीटर पर बाधित है। गर्जिया-बेतालघाट-खैरना-ओड़ाखाल-भटेरिया-मुक्तेश्वर राज्य मार्ग-62 भी 19वें किलोमीटर पर बंद है। रास्तों को खोलने के लिए संबंधित विभागों की टीमें काम कर रही हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में कुल 102 सड़कें बंद हैं। चमोली में सबसे ज्यादा 23 और पौड़ी में 17 सड़कें बंद हैं। रुद्रप्रयाग में 14, पिथौरागढ़ में 13, टिहरी में 11 और देहरादून में नौ सड़कें बंद हैं। अल्मोड़ा में आठ, हरिद्वार में छह, चंपावत, नैनीताल और उत्तरकाशी में पांच-पांच, बागेश्वर में चार और ऊधमसिंह नगर में एक सड़क बंद है।
केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक, प्रदेश की प्रमुख नदियां अभी खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं। हालांकि ऋषिकेश में गंगा और देवप्रयाग में भागीरथी का जलस्तर बढ़ रहा है। शुक्रवार सुबह आठ बजे ऋषिकेश में गंगा का जलस्तर 339.18 मीटर था, जबकि खतरे का निशान 340.50 मीटर है। हरिद्वार में गंगा 292.28 मीटर पर रही, जबकि खतरे का निशान 294 मीटर है।
देवप्रयाग में भागीरथी का जलस्तर 461.20 मीटर दर्ज किया गया और इसमें बढ़ोतरी हो रही है। रुद्रप्रयाग में अलकनंदा 625.40 मीटर और मंदाकिनी 624.44 मीटर पर रही। धारचूला में काली नदी का जलस्तर 888.90 मीटर दर्ज किया गया, जिसमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
Updated on:
22 Aug 2026 11:22 am
Published on:
22 Aug 2026 11:22 am
