New Guideline : सरकारी स्कूलों के क्लास रूम में अब शिक्षक और छात्र मोबाइल फोन नहीं चला सकेंगे। इसके लिए सरकार ने नई गाइडलाइन जारी कर दी है। छात्रों में मोबाइल फोन के बढ़ते दुष्प्रभाव को देखते हुए शिक्षा विभाग ने सख्ती बरतने का निर्णय किया है।
New Guideline : सरकारी स्कूलों में अब पठन-पाठन के दौरान मोबाइल का संतुलित उपयोग किया जाएगा। सरकार ने इसे लेकर नई गाइडलाइन जारी कर दी है। अब स्कूलों में शिक्षक एवं छात्र केवल शैक्षिक गतिविधियों में मोबाइल फोन का उपयोग करेंगे। शिक्षा महानिदेशक दीप्ति सिंह ने स्कूलों में मोबाइल फोन को लेकर दिशा निर्देश जारी किए। इसके तहत स्कूलों में मोबाइल उपयोग के लिए सख्त मानक तय किए गए हैं। ये मानक स्वास्थ्य विभाग के परामर्श से तैयार किए गए हैं। एक अधिकारी ने बताया कि मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से छात्रों का समय तो बर्बाद होता ही है। स्वास्थ्य के लिहाज से शारीरिक व मानसिक दुष्प्रभाव भी होते हैं। उन्होंने बताया कि हर स्कूल के प्रशासनिक प्रमुख को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि मोबाइल का उपयोग शैक्षणिक गतिविधियों और विद्यालयी अनुशासन को प्रभावित न करें। छात्रों में डिजिटल व्यवहार में सुधार, तकनीकी जागरूकता बढ़ाने और स्वस्थ आदतें विकसित करने पर जोर दिया गया है। उन्होंने सभी विद्यालयों को इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं। समय समय पर अभिभावकों को भी मोबाइल के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जाएगा।
उत्तराखंड के स्कूलों में कक्षा एक में प्रवेश की उम्र तय कर दी गई है। इसी के साथ लंबे समय चल रहा असमंजस भी खत्म हो गया है। शिक्षा सचिव रविनाथ रमन ने इसे लेकर स्थिति स्पष्ट की। सचिव के अनुसार, एक जुलाई को छह साल की आयु पूरी करने वाले बच्चे सरकारी स्कूलों में कक्षा एक में प्रवेश के पात्र होंगे। बताया कि सीबीएसई-आईसीएसई बोर्ड से मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में कक्षा एक में दाखिले को एक अप्रैल को छह वर्ष की उम्र का मानक यथावत रहेगा। आरटीई के तहत कक्षा एक में प्रवेश के लिए बच्चे की उम्र छह साल होनी जरूरी है। पर सरकारी स्कूलों में इस मानक के चलते दिक्कत आ रही थी। शिक्षकों और अभिभावकों ने आयु को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की थी। उत्तराखंड की भौगोलिक एवं विशिष्ट परिस्थितियों की वजह से उम्र के मानक में सरकार से विशेष रियायत ली गई है।