देहरादून

विकृत कामुकता : गुड़िया तोड़ भय दिखाकर मासूम बेटी से रेप के दोषी वायुसेना कर्मी को 20 साल की सजा

Punishment For Brutality : गुड़िया तोड़कर भय दिखाकर अपनी मासूम बेटी से रेप के दोषी पिता को कोर्ट ने 20 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दोषी वायुसेना कर्मी पर कोर्ट ने 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने इसे विकृत कामुकता का मामला बताते हुए कहा कि ऐसे कृत्य बच्चों के विकास के लिए बेहद हानिकारक और समाज के लिए कलंक हैं।

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Jan 15, 2026
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक फोटो

Punishment For Brutality: अपनी मासूम बेटी से रेप के दोषी वायुसेना कर्मी पिता को कोर्ट ने 20 साल कठोर करावास की सजा सुनाई है। ये मामला उत्तराखंड की राजधानी देहरादून का है। डिस्ट्रिक कोर्ट में सुनवाई के दौरान पीड़िता ने बताया कि जब वह पांच साल की थी तब से उसका पिता उसके साथ घिनौना कृत्य करते आया है। पीड़िता ने कोर्ट को बताया कि महज पांच साल की उम्र से ही वह अपने पिता की दरिंदगी का शिकार बनी थी। तब उसका पिता उसकी पसंदीदा गुड़िया छीनकर उसके हाथ पैर तोड़कर भय दिखाकर उसके साथ रेप करने लगा था। वह धमकी देता था कि अगर किसी को कुछ बताया तो उसका भी यही हाल करेगा। इसके बाद दरिंदे पिता ने उसे डर के साये में रखकर घिनौना काम शुरू किया। वायुसेना कर्मी पिता ने मथुरा, गुजरात और देहरादून में पोस्टिंग के दौरान कई बार उसका रेप किया। कोर्ट ने पीड़िता के बयानों के आधार पर बुधवार को दोषी पिता को 20 वर्ष कठोर कारावास सजा सुनाई। साथ ही राज्य सरकार को तीन लाख का मुआवजा पीड़िता को देने का आदेश भी दिया। विशेष न्यायाधीश (पोक्सो) अर्चना सागर की कोर्ट ने ये फैसला सुनाया।

वीडियो कॉल कर उतरवाता था कपड़े

रेप पीड़िता ने कोर्ट को बताया कि जब उसके पिता ड्यूटी पर बाहर होते थे तब वह उसे वीडियो कॉल कर कपड़े उतारने का दबाव बनाते थे। कपड़े नहीं उतारने पर उसे पीटने की धमकी दी जाती थी। पांच साल की उम्र में ही रेप का शिकार हुई पीड़िता ने 17 साल की आयु होने पर ये बात अपनी मां को बताई तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। विशेष लोक अभियोजक अल्पना थापा के मुताबिक 17 नवंबर 2023 को रायपुर थाने में मां की शिकायत पर एयरफोर्स कर्मी पर केस दर्ज हुआ था। पीड़िता के दो छोटे भाई हैं। इनमें से एक स्पेशल चाइल्ड (डाउन सिंड्रोम) है। दूसरे को ब्लड कैंसर है। मां मारपीट और बेटी यौन उत्पीड़न पर केवल इसलिए चुप रहे क्योंकि बच्चों का इलाज और घर का खर्च पिता पर निर्भर था।

कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश नाकाम  

बेटी से दुष्कर्म के इस केस को कोर्ट ने विकृत कामुकता का मामला बताया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे कृत्य बच्चों के विकास के लिए बेहद हानिकारक हैं। यह समाज के लिए कलंक है। मामले में बचाव पक्ष ने दलील दी कि मेडिकल रिपोर्ट में पीड़िता के शरीर पर चोट के निशान नहीं थे और हाइमन इन्टैक्ट (सुरक्षित) था इसलिए रेप नहीं हुआ। कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया। विशेष न्यायाधीश अर्चना सागर की कोर्ट ने कहा कि पीड़िता की गवाही विश्वसनीय है। कोई भी बेटी अपने सगे पिता पर ऐसे गंभीर और झूठे आरोप नहीं लगाएगी। जैसे-जैसे पीड़िता बड़ी हुई, उसे अपने साथ हो रहे गलत काम की समझ आई।

Published on:
15 Jan 2026 08:29 am
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