Dewas- देवास कलेक्ट्रेट में फर्जीवाड़ा: एडीएम का रीडर, नजूल का बाबू भी शामिल, आदिवासियों की जमीन बिकवाने बाबुओं ने जारी किए कलेक्टर के फर्जी आदेश
Dewas- देवास कलेक्ट्रेट में मंगलवार को फर्जीवाड़े का एक बड़ा मामला सामने आया। आदिवासियों की जमीन बिकवाने के लिए बाबुओं ने कलेक्टर के फर्जी आदेश जारी कर दिए। कलेक्टर कार्यालय और तहसीलों में पदस्थ कुछ बाबुओं ने अन्य आरोपी के साथ मिलकर इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। कलेक्टर कार्यालय में पदस्थ एडीएम का रीडर, नजूल का बाबू दलालों की मिलीभगत से विभिन्न विभागों में अधिकारियों के नाम पर कलेक्टर की अनुमति के फर्जी आदेश जारी कर रहे थे। जाली आदेश तैयार कर जमीनों की बिक्री की जा रही थी। इस मामले में पुलिस ने 4 आरोपियों को गिरफ़्तार कर लिया है। उनसे सख्ती से पूछताछ की जा रही है।
जिले के आदिवासियों की जमीनों की खरीद- बिक्री के लिए कलेक्टर की फर्जी अनुमति लगाकर भू-माफिया को लाभ पहुंचा रहे थे
पुलिस अधिकारियों के अनुसार सभी आरोपी, जिले के आदिवासियों की जमीनों की खरीद- बिक्री के लिए कलेक्टर की फर्जी अनुमति लगाकर भू-माफिया को लाभ पहुंचा रहे थे।
एक रजिस्ट्री के दौरान रजिस्ट्रार की नजर संदिग्ध दस्तावेज पर पड़ गई। उन्हें मामला गंभीर लगा। तब रजिस्ट्रार ने जिले के कलेक्टर को तत्काल इस बात की सूचना दी। कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने मामले की जांच कराई तो पोल खुल गई। उनके निर्देश पर बीएनपी पुलिस ने केस दर्ज किया।
एडीएम ऑफिस का रीडर संजीव जाटव, नजूल शाखा के बाबू रमेश लोबानिया, विजयागंज मंडी तहसील ऑफिस के बाबू जितेंद्र भद्रे और खातेगांव के दलाल महेंद्र कुशवाह को गिरफ़्तार किया है। अन्य आरोपियों की भी तलाश की जा रही है।
पता चला है कि कलेक्टर कार्यालय की नजूल शाखा सहित अलग-अलग तहसीलों में पदस्थ तीन बाबू लंबे समय से यह फर्जीवाड़ा कर रहे
जांच में पता चला है कि कलेक्टर कार्यालय की नजूल शाखा सहित अलग-अलग तहसीलों में पदस्थ तीन बाबू लंबे समय से यह फर्जीवाड़ा कर रहे थे। आवेदन प्रक्रिया पूरी करवाने के बाद सभी आरोपी अधिकारियों के जाली हस्ताक्षर और सील की नकल कर फर्जी आदेश जारी कर देते थे।
गिरोह बनाकर करते थे काम
दलाल महेंद्र कुशवाह उन्हें ढूंढ़ता था, जिनके काम अटके होते या अनुमति नहीं मिलती। वह उन्हें कलेक्ट्रेट में नजूल के बाबुओं से मिलवाता। बाबू आवेदन प्रक्रिया पूरी करवाते और लोगों को फर्जी आदेश थमा देते थे।