देवास

Delhi Building Collapse: खुद चला गया लेकिन अपनी आंखें दे गया अर्पित, मां का था लाडला, अंतिम विदाई में टूटा परिवार

Delhi Building Collapse Update: मंगलवार को देवास स्थित पैतृक गांव में अर्पित जाज (Arpit Jaj) का अंतिम संस्कार किया गया। अर्पित के पिता ने उसकी आंखों की पुतली (Cornea) दान किसी जरूरमंद को दान कर दी।
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Sep 08, 2026
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Delhi Building Collapse Update: देवास में हुआ Arpit Jaj का अंतिम संस्कार, पिता दान किया बेटे का कॉर्निया (फोटो सोर्स- Patrika)

Delhi Building Collapse Update Arpit Jaj:दिल्ली के सत्या निकेतन इलाके के पीजी बिल्डिंग हादसे में अब तक 7 लोगों के निधन की पुष्टि की गई है। मृतकों की सूची में मध्य प्रदेश के देवास जिले के रहने वाले अर्पित जाज का भी निधन हो गया था। 15 घंटे के बाद मंगलवार सुबह अर्पित को उसके कैलादेवी क्षेत्र के जय बजरंग नगर स्थित घर लाया गया और पूरे विधि-विधान के साथ अर्पित की बहन प्रियांशी, पिता भूपेंद्र और मां का रो-रोकर बुरा हाल है।

बता दें कि, अर्पित सत्य निकेतन (Satya Niketan) के हॉस्टल डेज की बिल्डिंग नम्बर 11 के कमरा नंबर 302 में था। वह हादसे के दिन सुबह ही घर से जन्माष्टमी-रक्षाबंधन की छुट्टी मनाकर वापस लौटा था और दोपहर में बिल्डिंग गिरने से वो नहीं रहा। हादसे में अब 7 लोगों के निधन की पुष्टि हो चुकी है। वह दिल्ली के एआरएसडी कॉलेज (ARSD College) में बीकॉम सेकंड ईयर का स्टूडेंट था और सीए की पढ़ाई कर रहा था।

अर्पित चला गया लेकिन, उसकी आंखे देखेंगी दुनिया

आंखों में अपने सपने लेकर अर्पित इस दुनिया से चला गया। लेकिन उसकी आंखें दुनिया देखती रहेंगी। अर्पित जाते-जाते किसी नेत्रहीन व्यक्ति की अंधेरी जिंदगी को रौशनी देकर गया है। अर्पित के पिता भूपेंद्र ने घोषणा की कि वह उसकी कॉर्निया (Cornea) को दान कर दिया है। पिता ने कहा कि हमने अर्पित की 'आंखों की पुतली' यानी कॉर्निया को किसी जरूरतमंद के लिए दान कर दी। शायद वह हमारे नहीं रहने के बाद भी दुनिया देख पाएगा। बता दें कि, अर्पित के पिता कैब ड्राइवर का काम करते है।

पढ़ाई में अच्छा और मां का लाडला था अर्पित- पिता भूपेंद्र

अर्पित के पिता ने बताया कि उनका पढ़ाई में अच्छा था और अपने सपनों को साकार करने के लिए खूब मेहनत भी करता था। अर्पित स्कूल खत्म होने के बाद बड़े शहर में पढ़ना चाहता था इसलिए हमने उसे दिल्ली भेज दिया था। वह अपनी पढ़ाई में अच्छा कर रहा था। पिता भूपेंद्र ने कहा कि अर्पित सबसे ज्यादा अपनी मां के करीब था। वह अपनी मां का लाडला था। इसलिए जब उसने अपने बेटे को हादसे के बाद की स्थिति में देखा तो वो मना करती रही कि यह उनका बेटा नहीं है। उसे अभी भी यकीन नहीं हो रहा है कि अर्पित अब दुनिया में नहीं रहा।

दोस्तों ने फोन कर दी थी जानकारी

अर्पित के एक रिश्तेदार ने बताया कि परिवार को हादसे की जानकारी अर्पित के दोस्तों ने दी थी। जानकारी मिलते ही दोस्तों ने परिवार को कॉल कर पूछा कि अर्पित घर पर ही है ना? इस पर मां ने जवाब देते हुए कहा कि वो तो दिल्ली के लिए निकल गया और अब तक पहुंच भी गया होगा। इसके बाद माता-पिता ने अर्पित के मोबाइल पर कॉल करना किया तो उसका मोबाइल बंद आया। इसके बाद माता-पिता रात में ही दिल्ली के लिए रवाना हो गए।

देवास के दोस्त के साथ कर रहा था पढ़ाई

अर्पित देवास के ही रहने वाले अपने दोस्त मयंक के साथ वहां पढ़ाई कर रहा था। मयंक ने कहा कि- वह और अर्पित स्कूल के समय से मित्र है। वह देवास के स्कूल में साथ पढ़ते थे। मयंक ने बताया कि वह किरोड़ीमल कॉलेज (KMC) का छात्र है और अर्पित एआरएसडी कॉलेज का। जिस समय यह हादसा हुए वह बिल्डिंग में था।

रातभर अस्पतालों से लेकर घटनास्थल के चक्कर काटते रहे माता-पिता

मिली जानकारी के अनुसार, माता-पिता रातभर अपने बेटे को खोजने के लिए एम्स, घटनास्थल और पुलिस स्टेशन के चक्कर काट रहे थे। तीन घंटे चक्कर काटने के बाद अर्जुन ट्रॉमा सेंटर में अर्पित के होने खबर माता-पिता को दी गई थी।

Updated on:
08 Sept 2026 01:30 pm
Published on:
08 Sept 2026 01:30 pm