
Farmers Protest- सोमवार को किसानों के हंगामे को लेकर पुलिस और प्रशासन की मुश्किलें बढ़ गई थी। किसान चार गुना मुआवजे की मांग कर रहे थे। इसी सिलसिले में वे भोपाल तक कूच करने की तैयारी में थे, लेकिन देवास प्रशासन ने उन्हें भोपाल जाने से पहले ही रोक दिया। किसानों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने के आरोप और पानी की बौछारें भी छोड़ने के आरोप लगाए हैं।
इंदौर के पश्चिमी रिंग रोड परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीन का चार गुना मुआवजा देने की मांग को लेकर करणी सेना परिवार और किसानों ने सोमवार को ट्रैक्टरों के साथ भोपाल कूच का ऐलान किया था। सोमवार को किसान जैसे ही इंदौर जिले के बरलाई जागीर से रवाना हुए उसके कुछ ही देर बाद पुलिस और प्रशासन ने उन्हें शिप्रा चौराहा पर ओवरब्रिज से पहले रोक दिया। किसानों को रोकने पर तनाव के हालात बने।
किसानों का आरोप है कि हम शांतिपूर्वक अपनी मांग रख रहे थे, लेकिन प्रशासन ने हमारे ऊपर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और आंसू के गोले भी छोड़े। इस दौरान कई किसान घायल भी हो गए हैं। किसानों ने प्रशासन की इस कार्रवाई पर गुस्से का इजहार किया है। इसके बाद किसान बरलाई जागीर में धरने पर बैठ गए। सोमवार शाम तक किसानों का धरना जारी था। ऐसे में शिप्रा-सांवेर मार्ग बंद रहा।
किसानों का कहना है कि किसान पिछले तीन वर्षों से अपनी मांगों को लेकर प्रशासन के सामने गुहार लगा रहे हैं। इस दौरान करीब 50 ज्ञापन दिए गए, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। करणी सेना परिवार के इंदौर जिलाध्यक्ष ऋषिराज सिंह सिसोदिया ने बताया कि किसान अपनी मांग मुख्यमंत्री तक पहुंचाने के लिए शांतिपूर्ण तरीके से भोपाल जा रहे थे। सिसोदिया ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने किसानों को रोकने के लिए बल प्रयोग किया। उनके मुताबिक आंसू गैस के गोले छोड़े गए, वाटर कैनन चलाए गए और पुलिस कार्रवाई में कुछ किसान घायल हुए हैं। इंदौर के ग्रेटर रिंग रोड परियोजना से 39 गांवों के 991 किसान प्रभावित हो रहे हैं और करीब 4,442 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की गई है। अब किसान नए नियमों के अनुसार 4 गुना मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं।