MP News: मध्यप्रदेश के अभयारण्य को और ताकत देने की तैयारी शुरू हो गई है। दो जिलों के बड़े वन क्षेत्र को इसमें शामिल करने का प्रस्ताव भेजा गया है, जिससे जंगल, बाघ और पर्यटन तीनों की तस्वीर बदल सकती है।
Wildlife Sanctuary Expansion: प्राकृतिक सौदर्य और समृद्ध जैव विविधता के लिए पहचाने जाने वाले खिवनी अभयारण्य (kheoni Sanctuary) का दायरा बढ़ाने की दिशा में वन विभाग ने ठोस पहल की है। अभयारण्य के विस्तार के लिए देवास और सीहोर जिले की पांच वन रेंज को इसमें शामिल करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। प्रस्ताव के तहत करीब 50 वर्ग किमी (12,350 एकड़) अतिरिक्त वन क्षेत्र खिवनी अभयारण्य में जोड़ा जाएगा, जिससे बाघ सहित अन्य वन्यजीवों और वन संसाधनों का बेहतर संरक्षण संभव हो सकेगा। वर्तमान में खिवनी अभयारण्य देवास और सीहोर जिले के 134.778 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। (MP News)
नए प्रस्ताव में देवास वनमंडल की कन्नौद, खातेगांव और पानीगांव रेंज तथा सीहोर जिले की आष्टा और इछावर रेंज को शामिल किया गया है। इन पांच रेंज के कुल 43 कक्ष-देवास की तीन रेंज के 29 कक्ष और सीहोर की दो रेंज के 14 कक्ष-अभयारण्य क्षेत्र में आएंगे। इन इलाकों में बाघ सहित अन्य वन्यजीवों की नियमित आवाजाही दर्ज की गई है।अभयारण्य का विस्तार होने से बाघ, तेंदुआ, भेड़िया जैसे मांसाहारी वन्यजीवों के लिए सुरक्षित कॉरिडोर विकसित होगा। साथ ही चारागाहों का विकास, पेयजल स्रोतों की व्यवस्था और वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
खिवनी अभयारण्य को भारत सरकार द्वारा इको-सेंसिटिव जोन घोषित किए जाने के बाद वन विभाग और मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग मिलकर एक नया ड्राफ्ट तैयार कर रहे हैं। इसके तहत अभयारण्य से जुड़े 40 गांवों को पर्यटन से जोड़ने की योजना है। गांवों में होम-स्टे, बोटिंग, रिसॉर्ट और रेस्टोरेंट जैसी सुविधाएं विकसित कर ग्रामीणों को रोजगार से जोड़ा जाएगा। इको-सेंसिटिव जोन के तहत माइनिंग पर रोक रहेगी और शोर, लाइट तथा वाहनों के हॉर्न जैसी गतिविधियों को नियंत्रित किया जाएगा। रेंजर भीमसिंह सिसौदिया ने बताया कि अभयारण्य के विस्तार का प्रस्ताव शासन को भेजा है, स्वीकृति मिलते ही आगे प्रक्रिया शुरू होगी।
उल्लेखनीय है कि खिवनी मालवा क्षेत्र का एक मात्र ऐसा अभयारण्य है जहां बाघों का मूवमेंट है और पर्यटक आसानी से उनका दीदार कर सकते हैं। फरवरी 2025 तक के आंकड़ों के हिसाब से यहां 10 बाघ है। वहीं इस साल की गणना में यह संख्या बढ़कर 12 से 13 होने की संभावना है। इसके अलावा अभयारण्य ने पक्षियों की 155 और तितलियों की 55 प्रजातियां मिलती है। यहां बाघ के अलावा तेंदुआ, भड़िया, सियार, लोमड़ी, लकड़बग्घा, नीलगाय, चिंकारा, जंगली सूअर, चौसिंघा, भालू जैसे जंगली जानवरों व मप्र का राजकीय पक्षी दूधराज भी पाया जाता है।
उधर खिवनी अभयारण्य को भारत सरकार द्वारा इको सेंसेटिव जोन शामिल करने के बाद वन विभाग और मप्र पर्यटन विभाग मिलकर एक नया ड्राफ्ट तैयार कर रहे हैं। इसके तहत खिवनी अभयारण्य से जुड़े 40 गांवों को पर्यटन से जोड़ने की तैयारी की जा रही है ताकि यहां के ग्रामीणों को उसका लाभ मिल सके। इसके तहत गांवों के तालाबों में बोटिंग, होम स्टे, रिजॉर्ट रेस्टोरेंट जैसी सुविधाएं विकसित की जाएगी ताकि पर्यटन के माध्यम से गांव के लोगों को रोजगार मिल सके। साथ ही ग्रामीणों की जागरूकता के चलते पर्यावरण का नुकसान कम से कम हो। साथ ही इको सेंसेटिव जोन में शामिल होने से इस क्षेत्र में माइनिंग जैसी गतिविधियां भी नहीं होगी। वहीं इस जोन में लाइट, वाहनों के हॉर्न, डीजे सहित अन्य गतिविधियों को नियंत्रित भी किया जा सकेगा। (MP News)