धमतरी

छत्तीसगढ़ में महानदी किनारे 12 शिवलिंग वाला शिवालय, 25 साल से नहीं बुझी अखंड ज्योत, राम-वनवास से जुड़ी है मान्यता

Shiva temple in Chhattisgarh: रुद्री स्थित रुद्रेश्वर महादेव मंदिर में 12 शिवलिंग हैं। महानदी किनारे बसे इस शिवालय में 25 साल से अखंड ज्योत जल रही है और मान्यता राम-वनवास से जुड़ी है।
2 min read
Sep 05, 2026
Mahadev Temple in CG
महानदी किनारे 12 शिवलिंग वाला शिवालय (Photo Patrika)

Mahadev Temple in CG: महानदी किनारे सुबह की पहली किरण के साथ जब मंदिर की घंटियां बजती हैं, तो रुद्री का रुद्रेश्वर महादेव परिसर सिर्फ पूजा का स्थल नहीं रहता, बल्कि आस्था और लोकस्मृति का जीवंत केंद्र बन जाता है। एक ओर चित्रोत्पला महानदी का प्रवाह, दूसरी ओर गर्भगृह में विराजमान रुद्रेश्वर महादेव और मंदिर के मुख्य द्वार के नीचे स्थापित 12 शिवलिंग। 25 साल से लगातार जल रही अखंड ज्योति इस शिवालय की सबसे अलग पहचान है। माघ पूर्णिमा पर जब आसपास के 52 गांवों के देवी-देवता यहां पहुंचते हैं, तो रुद्री का यह मंदिर पूरे इलाके की सामूहिक आस्था का केंद्र बन जाता है। लोक मान्यता के अनुसार वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण इस क्षेत्र से गुजरे थे और उन्होंने यहां रुद्रेश्वर महादेव की आराधना की थी।

20 करोड़ के कॉरिडोर से भव्य होगा परिसर

मंदिर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को देखते हुए इसके विकास की योजना जिला प्रशसान ने बनाई है। राज्य शासन ने मंदिर परिसर के समग्र विकास के लिए 20 करोड़ रुपए की लागत से भव्य कॉरिडोर विकसित करने की घोषणा की है। इससे रुद्रेश्वर महादेव मंदिर को धार्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की उम्मीद है।

मुख्य द्वार के नीचे 12 शिवलिंग

रुद्रेश्वर मंदिर की सबसे खास धार्मिक विशेषता इसके मुख्य प्रवेश द्वार के नीचे स्थापित 12 शिवलिंग हैं। स्थानीय परंपरा में इन सभी शिवलिंगों के अलग-अलग नाम और महत्व बताए जाते हैं। मंदिर के गर्भगृह में शिविलंग के साथ माता पार्वती, भगवान गणेश, कार्तिके और शेषशैय्या में भगवान विष्णु विराजमान है। गर्भगृह के सामने कालभैरव और माता शीतला की प्राचीन प्रतिमा स्थापित है। वहीं गर्भगृह के बाजू में श्रीराम दरबार की स्थापना की गई है।

प्राचीन रूद्रेश्वरी माता की अतिप्राचीन प्रतिमा

प्राचीन रूद्रेश्वरी माता की अतिप्राचीन प्रतिमा भी यहां आस्था का प्रमुख केन्द्र है। मंदिर परिसर का पुराना कदम वृक्ष भी यहां की प्राचीनता की स्मृतियों से जुड़ा माना जाता है। महानदी से मंदिर का रिश्ता केवल इसके किनारे बसे होने तक सीमित नहीं है। यहां प्रतिदिन सुबह महानदी के जल से रुद्रेश्वर महादेव का जलाभिषेक किया जाता है। सावन में यह परंपरा और भव्य हो जाती है। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु महानदी में स्नान कर शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं और रुद्राभिषेक करते हैं।

Updated on:
05 Sept 2026 02:14 pm
Published on:
05 Sept 2026 02:14 pm