धमतरी जिले में नगरी स्वास्थ्य केन्द्र में ऑक्सीजन की कमी के चलते एक युवक की मौत के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की नींद नहीं टूटी है।
धमतरी. धमतरी जिले में नगरी स्वास्थ्य केन्द्र में ऑक्सीजन की कमी के चलते एक युवक की मौत के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की नींद नहीं टूटी है। जिला अस्पताल में सिलेंडर की व्यवस्था तो है, लेकिन इसकी मॉनिंटरिंग सही ढंग से नहीं हो रही है। ऐसे में यहां इस घटना की पुनर्रावृत्ति हो सकती है।
स्वास्थ्य मंत्री अजय चन्द्राकर का गृहजिला होने के बाद भी जिला अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं समेत विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी बनी हुई है। पत्रिका टीम ने अस्पताल का जायजा लिया, तो देखा कि यहां गंभीर रूप से बीमार मरीज को ऑक्सीजन चढ़ाया गया था, लेकिन इसकी मॉनिटरिंग के लिए कोई विशेषज्ञ नहीं था।
उल्लेखनीय है कि इन दिनों स्वाइन फ्लू समेत अन्य मौसमी बीमारी का प्रकोप चल रहा है। ऐसे मेंं वनांचल क्षेत्र से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। जरूरत पडऩे पर इन मरीजोंं को डाक्टर के निर्देश पर ऑक्सीजन भी चढ़ाया जा रहा है। आज की स्थिति मेंं वार्ड में करीब 80 ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध था।
यहीं नहीं नवजात शिशु परिचर्या (एसएनसीयू) में 46-46 किलो का 4 जंबो ऑक्सीजन सिलेंडर लगाया गया है, जिसकी मॉनिटरिंग स्टाफ नर्स के भरोसे की जा रही थी। हालांकि यहां आपातकालीन स्थिति से निबटने के लिए अलार्म सिस्टम भी लगाया गया है। इसके बाद भी थोड़ी सी चूक मरीजोंं की जान पर आफत ला सकती है।
तपड़ता रहा मरीज
रामकुंवर ध्रुव (डोंगरडुला) ने बताया कि पिछले दिनों एक गंभीर मरीज को संजीवनी 108 के माध्यम से इलाज के लिए अस्पताल लाया गया, लेकिन आक्सीजन नहीं मिलने से वह तड़पता रहा। किसी तरह अस्पताल पहुंचने के बाद तत्काल उसे ऑक्सीजन का सिलेंडर चढ़ाया गया।
प्रतिदिन खपत एक नजर में
सूत्रों की मानें तो 2 सौ बिस्तर वाले जिला अस्पताल में प्रतिदिन 8 छोटे-बड़े ऑक्सीजन सिलेंडर लगाता है। इस प्रकार एक माह में यहां औसत 250 ऑक्सीजन सिलेंडर की खपत होती है। बताया गया है कि सिलेंडर की आपूर्ति सप्लाई एजेंसी रसमड़ा (दुर्ग) से होती है। जबकि अस्पताल में प्रतिदिन 20 की संख्या में गंभीर मरीज पहुंचते हैं। इस हिसाब से सिलेंडर की मांग के अनुरूप सप्लाई नहीं हो रही है। ऐसे में कभी भी गंभीर हादसा हो सकता है। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग उदासीनता बरत रहा है।
सिलेंडर की कमी
बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए जिले में 7 संजीवनी वाहनों का संचालन केवीके कंपनी द्वारा किया जा रहा है। जबकि शहर मेंं 2 संजीवनी वाहन अपनी सेवा दे रहे है। एक जानकारी के अनुसार संजीवनी वाहन में १६ किलो का एक ऑक्सीजन सिलेंडर मुश्किल से 4 दिन चलता है। बताया जाता है कि शहर में चलने वाले संजीवनी वाहन मेंं जैसे-तैसे सिलेंडर की व्यवस्था हो जाती है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों मेंं चलने वाले ५ संजीवनी वाहनोंं में सिलेंडर की कमी बनी हुई है।