
Chhattisgarh News: धमतरी जिले से इंसानियत और सेवा की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने एक परिवार की खोई हुई खुशियां वापस लौटा दीं। जिस बेटे को परिजन मृत मानकर उसका अंतिम संस्कार कर चुके थे, वही बेटा 18 दिन बाद सही-सलामत अपने घर लौट आया। मामला सामने आने के बाद परिवार के साथ-साथ पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
दरअसल, धमतरी के संबलपुर मोड़ स्थित एक पेट्रोल पंप के पास एक युवक असहाय हालत में बैठा मिला। स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना दी, जिसके बाद इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी के शिवा प्रधान मौके पर पहुंचे और युवक को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया। युवक के पास मिले वोटर आईडी कार्ड के आधार पर उसकी पहचान गिरौधपुरी, चौकी सुकली बरेली निवासी मोतीलाल विश्वकर्मा के रूप में हुई। इसके बाद शिवा प्रधान ने पुलिस की मदद से युवक को उसके गांव पहुंचाया।
जब पुलिस और शिवा प्रधान युवक को लेकर उसके गांव पहुंचे, तो वहां एक चौंकाने वाला सच सामने आया। परिजनों ने बताया कि वे मोतीलाल को मृत समझकर उसका अंतिम संस्कार पहले ही कर चुके हैं। परिजनों के मुताबिक, 28 जुलाई को सेमरा नाला के पास एक क्षत-विक्षत शव मिला था। शव की पहचान मोतीलाल के रूप में की गई थी। इसके बाद परिवार ने उसे अपना बेटा मानकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया था।
लेकिन 18 दिन बाद जब मोतीलाल खुद परिवार के सामने जिंदा खड़ा था, तो परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। अपने बेटे को सामने देखकर परिवार की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। जिस बेटे को वे हमेशा के लिए खो चुके थे, उसके वापस लौटने से पूरे परिवार में खुशी का माहौल है।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि 28 जुलाई को सेमरा नाला के पास मिला वह क्षत-विक्षत शव आखिर किसका था? अगर वह शव मोतीलाल का नहीं था, तो उसकी पहचान किस आधार पर की गई और किस तरह परिजनों ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया? इस मामले ने पुलिस जांच और शव की पहचान की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब यह जांच का विषय है कि आखिर उस शव की सही पहचान क्यों नहीं हो सकी और वह शव किस व्यक्ति का था। मामला सामने आने के बाद पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल, 18 दिन बाद मोतीलाल के जिंदा घर लौटने से परिवार को उनकी सबसे बड़ी खुशी वापस मिल गई है, लेकिन अब उस अज्ञात शव की पहचान इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल बन गई है।