
jaundice cases: शहर के नवापारा वार्ड में करीब एक महीने बाद एक बार फिर पीलिया के मरीज मिलने से स्वास्थ्य और पेयजल व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। वार्ड में स्वास्थ्य संबंधी सर्वे के दौरान 10 लोगों के पीलिया से पीड़ित होने की जानकारी सामने आई है। वहीं एक व्यक्ति टाइफाइड से संक्रमित मिला है। सभी प्रभावित लोगों का निजी अस्पतालों में उपचार चल रहा है। लगातार दूसरी बार वार्ड में पीलिया के मामले सामने आने के बाद अब दूषित पानी की आशंका के साथ नालियों की सफाई और आसपास की स्वच्छता व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
इससे पहले भी नवापारा वार्ड में दूषित पानी की वजह से करीब 10 से 12 लोगों के पीलिया और टाइफाइड की चपेट में आने की बात सामने आई थी। उस समय पानी की पाइपलाइन में लीकेज से दूषित पानी की सप्लाई की शिकायत मिली थी। निगम के जल विभाग के अनुसार करीब 20 से 25 स्थानों पर सुधार कार्य कराया गया था। इसके बाद स्थिति सामान्य होने की उम्मीद थी, लेकिन करीब एक महीने बाद फिर पीलिया के मरीज मिलने से चिंता बढ़ गई है।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वार्ड पार्षद पूर्णिमा गजानंद रजक के घर में ही तीन लोग पीलिया से पीड़ित हैं। पार्षद का कहना है कि उनके घरों में पानी साफ आ रहा है, लेकिन इसके बावजूद बीमारी दोबारा क्यों फैल रही है, यह समझ से परे है। उन्होंने वार्ड की नालियों की सफाई व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। पार्षद के मुताबिक कई जगह नालियां गोबर और गंदगी से अटी पड़ी हैं। ऐसे में नालियों की नियमित सफाई नहीं होने से पेयजल लाइन के आसपास संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने घरों में सप्लाई किए जा रहे पानी की जांच कराने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बीमारी फैलने की वजह क्या है।
मितानिन संतोषी निर्मलकर ने बताया कि वार्ड में सर्वे किया गया था। इसमें 10 लोग पीलिया से पीड़ित मिले हैं, जबकि एक व्यक्ति टाइफाइड से पीड़ित है। इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को दे दी गई है। प्रभावित लोगों के साथ ही वार्डवासियों को एहतियात के तौर पर पानी उबालकर पीने की सलाह दी गई है। नवापारा वार्ड में पीलिया से पीड़ित पाए गए लोगों में पायल कोसरिया, राशि रजक, ज्योति रजक, यश रजक, याशी यादव, हैप्पी यादव, मोशिन, माही, खिलावन रजक और मौली रजक शामिल हैं। वहीं राहुल निर्मलकर के टाइफाइड से पीड़ित होने की जानकारी सामने आई है। सभी का निजी अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
लगातार दूसरी बार पीलिया के मरीज मिलने के बाद वार्डवासियों ने पेयजल व्यवस्था की जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि बीमारी की वास्तविक वजह सामने लाने के लिए अलग-अलग स्थानों से पानी के नमूने लेकर उनकी जांच कराई जानी चाहिए। साथ ही पाइपलाइन, लीकेज और नालियों की स्थिति की भी जांच जरूरी है। वार्डवासियों का कहना है कि यदि पानी की गुणवत्ता में किसी तरह की समस्या है तो समय रहते उसका समाधान किया जाना चाहिए, ताकि संक्रमण और अधिक लोगों तक न पहुंचे। इसके अलावा नालियों की सफाई और गंदगी वाले स्थानों पर विशेष सफाई अभियान चलाने की जरूरत है।
नगर निगम के जल विभाग के अनुसार वर्तमान में पेयजल को लेकर किसी प्रकार की शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। जल विभाग सभापति अखिलेश सोनकर ने बताया कि पूर्व में लीकेज के कारण दूषित पानी सप्लाई होने की शिकायत मिली थी। उस समय करीब 20 से 25 स्थानों पर सुधार कार्य कराया गया था।हालांकि अब दोबारा पीलिया के मामले सामने आने के बाद यह देखना जरूरी होगा कि बीमारी का कारण क्या है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से मरीजों की स्थिति की निगरानी के साथ पानी और आसपास के वातावरण की जांच कराई जाती है या नहीं, इस पर वार्डवासियों की नजर है।