धमतरी

धमतरी में हाथियों ने जमकर मचाया उत्पात, पहले तोड़ा ट्रैप कैमरा फिर…लोगों में दहशत

Elephant terror in Dhamtari: टाइगर रिजर्व में वन्य प्राणियों की गणना के लिए लगाए गए एक ट्रैप कैमरे को हाथी ने तोड़कर नुकसान पहुंचाया है। इसके अलावा कई स्थानों के कैमरे मौके से गायब है।

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Mar 03, 2024

Elephant terror in Chhattisgarh: टाइगर रिजर्व में वन्य प्राणियों की गणना के लिए लगाए गए एक ट्रैप कैमरे को हाथी ने तोड़कर नुकसान पहुंचाया है। इसके अलावा कई स्थानों के कैमरे मौके से गायब है। विभाग चोरी का अंदेशा जाहिर कर रहा।

बाघ समेत वन्य प्राणियों के सरंक्षण के लिए यहां धमतरी-गरियाबंद के क्षेत्र को मिलाकर सीतानदी-उदंती टाइगर रिजर्व बनाया गया है। यहां वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों से इनकी संख्या भी बढ़ रही है। उल्लेखनीय है कि वर्ष-2005 के बाद वन्य प्राणियों की विधिवत गणना रिपोर्ट नहीं आई है। टाइगर रिजर्व में भी वन्य प्राणियों की संख्या का सही-सही पता नहीं चल रहा। इसे देखते हुए शासन ने अब फिर से वन्य प्राणियों की गणना कराने का निर्णय लिया है। इसके तहत सीतानदी-उदंती टाइगर रिजर्व में जगह-जगह ट्रैप कैमरा लगाए गए हैं। इसमें धमतरी जिले की सीमा में टाइगर रिजर्व के सीतानदी रेंज, अरसीकन्हार रेंज और रिसगांव रेंज में 200 ट्रैप कैमरा लगाया गया है, जहां रोजाना विविध वन्य प्राणियों के वीडियो फुटेज सामने आ रही है। इस बीच रिसगांव रेंज के पश्चिम मुंहकोट के वनकक्ष क्रमांक-300 में लगाए गए ट्रैप कैमरा को एक हाथी ने तोड़कर तहस-नहस कर दिया। बीते 28 फरवरी को पूर्वान्ह यह घटना ट्रैप कैमरा में ट्रेस हुआ है, जिसमें हाथी कैमरा को नुकसान पहुंचाते हुए दिख रहा है।

60 से अधिक कैमरों की चोरी

वन विभाग के सूत्रों के अनुसार पिछले पांच सालों में रिसगांव, अरसीकन्हार और सीतानदी रेंज में 60 से ज्याद ट्रैप कैमरों की चोरी हो चुकी है। बाकायदा संबंधित रेंजरों ने इसकी शिकायत थाने में भी दर्ज कराई, लेकिन आज तक ट्रैप कैमरा चुराने वालों को पकड़ा नहीं जा सका। बता दें कि टाइगर रिजर्व के इन्हीं क्षेत्र में नक्सलियों की भी दखलदांजी है, जिसके ट्रैप कैमरों की चोरी और नुकसान को लेकर नक्सलियों की करतूत से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

जंगल में जगह-जगह बिना सिग्नल वाले कैमरे भी लगाए

धमतरी जिले के तहत आने वाले टाइगर रिजर्व के एरिया में 2 सौ में से 100 कैमरा बिना सिग्नल के हैं, अर्थात इस कैमरे में दूसरे कैमरे की तरह सिग्नल लाइट नहीं जलती है। इसका फायदा यह होता है कि वन्य प्राणी हो या फिर लकड़ी लाने वाले ग्रामीणों की नजर कैमरे पर नहीं पड़ती, वह सुरक्षित रहता है। जबकि ट्रैप कैमरों में सिग्नल लाइट के कारण नुकसान की संभावना रहती है।

रिसगांव रेंज के मुंहकोट के वनकक्ष क्रमांक-300 में हाथी ने ट्रैप कैमरा को तोड़ दिया है। इसका फुटेज भी सामने आया है। कुछ अन्य स्थानों से कैमरे चोरी हुए हैं। पता चलने पर दोबारा वहां कैमरा लगाया जा रहा है। - वरूण जैन, निदेशक सीतानदी-उदंती टाइगर रिजर्व

Published on:
03 Mar 2024 11:22 am
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