
Dhamtari Special Olympics: हौसले जब आंसुओं की भट्टी में तपकर फौलाद बनते हैं, तो इतिहास रचा जाता है। धमतरी के नयापारा वार्ड स्थित सार्थक स्कूल के विशेष छात्र सत्यांशु दीप (25) ने कुछ ऐसा ही करिश्मा कर दिखाया है। अपनी शारीरिक अक्षमताओं और समाज के तीखे तानों को पीछे छोड़ते हुए सत्यांशु का चयन स्पेशल ओलंपिक्स भारत की राष्ट्रीय टीम में हुआ है।
वे आगामी 12 से 16 जुलाई तक स्वीडन में आयोजित होने जा रहे प्रतिष्ठित 'स्पेशल ओलंपिक्स गोथिया ट्रॉफी-2026' में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। मंगलवार को जब स्कूल में उनका सम्मान हुआ, तो वर्षों का दर्द और आज की ऐतिहासिक खुशी आंसुओं के रूप में छलक पड़ी।
सम्मान समारोह के दौरान पूरा माहौल उस वक्त बेहद भावुक हो गया, जब बेटे की इस अकल्पनीय अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि को याद कर मां रंभा दीप अपने आंसू नहीं रोक सकीं। मां को रोता देख देश का मान बढ़ाने जा रहे चैंपियन सत्यांशु की आंखें भी भर आईं और दोनों मंच पर ही फूट-फूटकर रो पड़े।
यह आंसू उस संघर्ष के थे, जो उन्होंने अकेले समाज से लडक़र काटा था। सत्यांशु ने रुंधे गले से कहा कि मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मैं कभी खेलने के लिए विदेश जाऊंगा। मुझे मेरे परिवार और सार्थक स्कूल के शिक्षकों का जो प्यार और मार्गदर्शन मिला, उसी ने मुझे आज इस मुकाम पर पहुंचाया है।
सत्यांशु के पिता राजस्व विभाग में कर्मचारी हैं। मां रंभा दीप ने बताया कि सत्यांशु की शुरुआती पढ़ाई प्राथमिक शाला जालमपुर से 5वीं तक हुई। बचपन में आसपास के बच्चे और लोग सत्यांशु को 'गूंगा' या 'हकलाने वाला' कहकर चिढ़ाते थे। लोग ताना मारते थे कि यह जिंदगी में कुछ नहीं कर पाएगा।
रंभा के पिता कबड्डी के खिलाड़ी रहे हैं, उन्हीं से प्रेरणा लेकर मां ने हार नहीं मानी। उन्होंने लोगों के तानों को नजरअंदाज कर सत्यांशु को ऑनलाइन फुटबॉल की ट्रेनिंग देनी शुरू की। जब मां अपने विशेष बच्चे को ट्रेनिंग देती, तब भी लोग हंसते और तंज कसते थे, लेकिन मां-बेटे की जिद के आगे हर रुकावट छोटी साबित हुई।
खेलों के प्रति सत्यांशु की दीवानगी अद्भुत है। उसे क्रिकेट, बास्केटबॉल और फुटबॉल खेलना बेहद पसंद है। वह अब तक ओडिशा, अहमदाबाद, फरीदाबाद, रोहतक, पांडुचेरी, ग्वालियर समेत 10 से अधिक राज्यों में अपनी खेल प्रतिभा का लोहा मनवा चुका है। हरियाणा के रोहतक में आयोजित नेशनल चैंपियनशिप की लॉन्ग जंप (लंबी कूद) प्रतियोगिता में उसने गोल्ड मेडल जीता था, जबकि 200 मीटर दौड़ में सिल्वर मेडल पर कब्जा जमाया था। उसकी प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह अब तक 15 से ज्यादा मेडल अपने नाम कर चुका है।
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि धमतरी जिले के लिए यह अत्यंत हर्ष और गौरव का विषय है। सत्यांशु दीप का चयन स्पेशल ओलंपिक भारत के तहत भारतीय फुटबाल टीम में हुआ है। यह उपलब्धि सत्यांशु की मेहनत लगन और खेल के प्रति समर्पण का परिणाम है। उन्होंने सत्यांशु को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए अग्रिम शुभकामनाएं दी।
मां रंभा ने बताया कि साल 2019-20 में उन्हें 'पांडे सर' के माध्यम से विशेष बच्चों के स्कूल 'सार्थक' की जानकारी मिली। स्कूल में दाखिले के बाद संस्था की अध्यक्ष डॉ. सरिता दोशी के मार्गदर्शन में प्रशिक्षक मैथिली गोड़े और स्नेहा राठौर ने सत्यांशु के भीतर छिपे हुनर को पहचाना और उसे तराशना शुरू किया।
प्रशिक्षिका स्नेहा राठौर ने बताया कि सत्यांशु बास्केटबॉल, गुलाची, बैडमिंटन, फुटबॉल समेत कई खेलों में 'ऑलराउंडर' है। पूरे छत्तीसगढ़ से सिर्फ सार्थक स्कूल के सत्यांशु का चयन होना अपने आप में एक बहुत बड़ी मिसाल है, जो यह साबित करती है कि अगर सही अवसर मिले तो विशेष बच्चे भी आसमान छू सकते हैं।
समाज कल्याण विभाग की उप संचालक मनीषा पांडे ने कहा कि सत्यांशु का फुटबाल टीम में चयन समाज कल्याण विभाग और पूरे धमतरी जिले के लिए ऐतिहासिक और भावुक क्षण है। यह सफलता इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जब विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को सही दिशा, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और समान अवसर मिले तो वे आसमान छू सकते हैं। विभाग द्वारा संचालित और अनुदानित विशेष विद्यालयों का मूल उद्देश्य यही है कि हर दिव्यांग बच्चों के भीतर छिपी प्रतिभा को तराशा जाए। स्वीडन की धरती पर धमतरी का लाल सफलता का झंडा गाड़ेगा।