
Sugar Price: रक्षाबंधन पर्व के ठीक पहले आम आदमी की रसोई का बजट बिगड़ गया है। एक महीने में शक्कर के भाव में 25 रूपए की तेजी आई है। जुलाई के अंतिम सप्ताह में शक्कर का भाव चिल्हर में प्रतिकिलो 45 रूपए था। 24 अगस्त को दोपहर 1 बजे की स्थिति में प्रतिकिलो का भाव 70 रूपए हो गया था। थोक में प्रतिकिलो 68 रूपए का भाव था। वहीं शाम 5 बजे शक्कर प्रतिकिलो 64 से 66 रूपए हो गया था। ट्रेडिंग कंपनी के संचालकों ने बताया कि शक्कर के भाव में हर घंटे बदलाव हो रहा है। सप्ताहभर पूर्व चिल्हर में शक्कर प्रतिकिलो 70 रूपए तक पहुंच गया था।
इधर भाव में तेजी के बावजूद शक्कर की डिमांड बनी हुई है। त्यौहारी सीजन को देखते हुए व्यापारी भी तेजी को लेकर चिंतिंत हैं। थोक किराना कारोबारी दीपक जेठवानी, मनोज माखीजा ने बताया कि शक्कर की कीमतों में इस तेजी के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने और उससे जुड़े कच्चे माल की मांग बढऩे, गन्ने की पैदावार प्रभावित होने तथा त्योहारों के पहले मांग बढऩे से बाजार में आपूर्ति का दबाव बढ़ा है। कारोबारियों का कहना है कि यदि आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में कीमत और बढ़ सकती है।
शक्कर की कीमतों में 23 अगस्त को कुछ राहत जरूर आई है, लेकिन भाव अब भी एक दशक के सामान्य स्तर से काफी ऊपर हैं। ऐसे में त्योहारों के बीच उपभोक्ताओं की नजर अब बाजार की अगली चाल पर है। गन्ने की उपलब्धता, एथेनॉल उत्पादन की मांग, चीनी मिलों की आपूर्ति और बाजार में स्टॉक, इन सभी कारकों पर कीमतों की दिशा निर्भर करेगी। फिलहाल हालात यह बता रहे हैं कि शक्कर की महंगाई ने सिर्फ रसोई का बजट नहीं बिगाड़ा, बल्कि त्योहार की मिठास का हिसाब भी बदल दिया है।
शक्कर महंगी होने का असर अब सीधे मिठाई और होटल कारोबार पर दिखाई दे रहा है। धमतरी होटल व्यवसायी संघ के अध्यक्ष पद्माकर वाइकर ने बताया कि पेट्रोल-डीजल और कमर्शियल गैस की बढ़ी कीमतों के बाद अब शक्कर और परिवहन लागत ने कारोबार की लागत और बढ़ा दी है। उनका कहना है कि लागत बढऩे के कारण मिठाइयों के दाम बढ़ाना कारोबारियों की मजबूरी बन गई है। पहले 100 रुपये पाव बिकने वाली मिठाई अब करीब 110 रुपये पाव, जबकि 200 रुपये पाव की जलेबी बढक़र करीब 240 रुपये पाव हो गई है।
शक्कर महंगी होने का असर अब सीधे मिठाई और होटल कारोबार पर दिखाई दे रहा है। धमतरी होटल व्यवसायी संघ के अध्यक्ष पद्माकर वाइकर ने बताया कि पेट्रोल-डीजल और कमर्शियल गैस की बढ़ी कीमतों के बाद अब शक्कर और परिवहन लागत ने कारोबार की लागत और बढ़ा दी है। उनका कहना है कि लागत बढऩे के कारण मिठाइयों के दाम बढ़ाना कारोबारियों की मजबूरी बन गई है। पहले 100 रुपये पाव बिकने वाली मिठाई अब करीब 110 रुपये पाव, जबकि 200 रुपये पाव की जलेबी बढक़र करीब 240 रुपये पाव हो गई है।
सरकार एक तरफ एथेनॉल बनाकर पर्यावरण बचा रही है, लेकिन दूसरी तरफ गरीब और मध्यम वर्ग की थाली से मिठास गायब हो रही है। शक्कर के दाम अचानक इतना बढऩा समझ से परे है। सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए।
सीमा साहू, गृहणी लालबगीचा वार्ड
बाजार में शक्कर के दाम बढऩे के साथ मिठाइयों और पेय पदार्थों में सैकरीन के गलत या अनधिकृत इस्तेमाल की आशंका की भी चिंता बढ़ गई है। खाद्य पदार्थों में किसी भी स्वीटनर का इस्तेमाल निर्धारित मानकों और अनुमत मात्रा के अनुसार ही किया जाना चाहिए। विशेषज्ञों के मुताबिक बिना जानकारी या अनियंत्रित मात्रा में सैकरीन का सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है।