
Chhattisgarh Protest: धमतरी जिले में मंगलवार को कलेक्ट्रेट परिसर आंदोलन का केंद्र बना रहा। एक ओर अशासकीय शिक्षकों ने स्कूलों में पाठ्यपुस्तकों की कमी को लेकर कलेक्ट्रेट का घेराव किया, वहीं दूसरी ओर प्रदेश मितानिन संघ के बैनर तले सैकड़ों मितानिनों ने अपनी तीन सूत्रीय मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। दोनों संगठनों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए मांगें पूरी नहीं होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।
नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के बाद भी विद्यार्थियों को समय पर पाठ्यपुस्तकें नहीं मिलने से नाराज जिले भर के अशासकीय शिक्षक बड़ी संख्या में कलेक्ट्रेट पहुंचे। शिक्षकों ने नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया और पाठ्यपुस्तक निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। शिक्षकों का कहना है कि स्कूल खुलने के काफी समय बाद भी कई विद्यार्थियों को आवश्यक किताबें उपलब्ध नहीं हो सकी हैं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
ऐसे में शिक्षकों को भी शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। अशासकीय शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की बात तो की जाती है, लेकिन बच्चों को समय पर किताबें तक उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। उन्होंने मांग की कि पाठ्यपुस्तक निगम जल्द से जल्द सभी स्कूलों में पर्याप्त संख्या में पुस्तकें उपलब्ध कराए।
प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट किया कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो प्रदेश स्तर पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने रायपुर स्थित पाठ्यपुस्तक निगम कार्यालय के घेराव की चेतावनी भी दी। प्रशासनिक अधिकारियों ने शिक्षकों की मांगों को शासन तक पहुंचाने और उचित कार्रवाई के लिए अग्रेषित करने का आश्वासन दिया है। हालांकि शिक्षक संगठन फिलहाल आश्वासन से संतुष्ट नजर नहीं आ रहा और आगे की रणनीति बनाने की बात कह रहा है।
इधर प्रदेश मितानिन संघ के आह्वान पर जिले भर से सैकड़ों मितानिनें भी कलेक्ट्रेट पहुंचीं। उन्होंने अपनी लंबित मांगों को लेकर नारेबाजी की और शासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। मितानिनों की प्रमुख मांगों में एमटी, बीसी और एचएफ कार्यकर्ताओं का राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) में संविलियन, क्षतिपूर्ति मानदेय में 50 प्रतिशत वृद्धि और ठेका प्रथा समाप्त करना शामिल है।
प्रदर्शन कर रही मितानिनों का कहना था कि उनकी कई मांगें चुनाव के दौरान किए गए वादों और गारंटियों का हिस्सा थीं, लेकिन अब तक उन पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इसी कारण प्रदेशव्यापी आंदोलन के तहत धमतरी में प्रदर्शन आयोजित किया गया। मितानिनों ने कलेक्टर के माध्यम से शासन को ज्ञापन सौंपते हुए जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले समय में प्रदेशभर में उग्र आंदोलन किया जाएगा।
एक ही दिन में दो बड़े संगठनों के प्रदर्शन के कारण कलेक्ट्रेट परिसर में दिनभर आंदोलन का माहौल बना रहा। शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर हुए इन प्रदर्शनों ने प्रशासन का ध्यान अपनी ओर खींचा। अब दोनों संगठनों की निगाहें शासन के फैसले पर टिकी हैं कि उनकी मांगों पर कब और क्या कार्रवाई होती है।