
Chhattisgarh Heavy Rain: धमतरी जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों की बदहाल बुनियादी सुविधाओं और प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है। सिहावा विधानसभा क्षेत्र के चर्रा कच्छारपारा में उफनते डुमर नाले के कारण बीमार गोपेश कुमार पटेल को रातभर इलाज के लिए तड़पना पड़ा। शनिवार सुबह जान जोखिम में डालकर ग्रामीणों और सरपंच रुपेश कुमार ध्रुव ने खाट को अस्थायी स्ट्रेचर बनाया और कंधे पर उठाकर उफनता नाला पार कराकर मरीज को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया। फिलहाल अस्पताल में उसकी हालत सामान्य है।
मानसून में टापू बनने वाले इस गांव के ग्रामीणों ने शासन से डुमर नाले पर तत्काल पुलिया निर्माण की मांग की है। दूसरी ओर, कैचमेंट एरिया में हो रही भारी बारिश से गंगरेल बांध अपनी कुल क्षमता (32.150 टीएमसी) के करीब पहुंच गया है। जलस्तर नियंत्रित करने के लिए इस सीजन में पहली बार बांध के 5 रेडियल गेट खोलकर महानदी में 32,950 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे तटीय इलाकों के 72 गांवों में अलर्ट जारी कर दिया गया है।
मानसून के दौरान डुमर नाले में पानी बढ़ने के बाद चर्रा कच्छारपारा का संपर्क कई बार प्रभावित हो जाता है। नाला उफान पर आने के बाद ग्रामीणों को जरूरी काम के लिए भी काफी परेशानी होती है। सबसे ज्यादा दिक्कत बीमार और बुजुर्ग लोगों को अस्पताल पहुंचाने में होती है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दिनों में गांव की स्थिति लगभग टापू जैसी हो जाती है। नाले पर स्थायी पुलिया नहीं होने के कारण हर साल ऐसी परिस्थितियां बनती हैं। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से डुमर नाले पर जल्द से जल्द पुलिया निर्माण कराने की मांग की है, ताकि बारिश के दौरान आवागमन बाधित न हो और आपात स्थिति में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सके।
इधर, धमतरी जिले में लगातार हो रही बारिश का असर गंगरेल बांध के जलस्तर पर भी दिखाई दे रहा है। कैचमेंट एरिया में भारी बारिश के चलते बांध अपनी कुल जलभराव क्षमता 32.150 टीएमसी के करीब पहुंच गया है। जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए इस सीजन में पहली बार गंगरेल बांध के 5 रेडियल गेट खोले गए हैं। बांध से महानदी में करीब 32,950 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इसके चलते महानदी के तटीय क्षेत्रों में प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। पानी छोड़े जाने के बाद नदी किनारे बसे 72 गांवों में अलर्ट जारी किया गया है।
बांध से पानी छोड़े जाने के बाद महानदी के आसपास के इलाकों में प्रशासन की ओर से लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। नदी और नालों के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी की आशंका को देखते हुए तटीय क्षेत्रों में निगरानी रखी जा रही है। ग्रामीणों से नदी-नालों के आसपास जाने और तेज बहाव वाले पानी को पार करने से बचने की अपील की गई है। लगातार बारिश के बीच एक ओर गंगरेल बांध का जलस्तर नियंत्रित करने के लिए गेट खोले गए हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण इलाकों में नाले उफान पर हैं। चर्रा कच्छारपारा की घटना ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि मानसून से पहले ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरी पुल-पुलिया और आवागमन की सुविधाओं को लेकर कितनी तैयारी की गई है।