धार

कलेक्टर का आदेश…14 पंप की जांच में हो गई खानापूर्ति

न नापतोल को कमी नजर आई, न आपूर्ति विभाग को दिखा घालमेल, लगातार हो रही पेट्रोल पंपों की शिकायतें
2 min read
Jun 27, 2018
There was a lack of inappropriate attitude, not showing the supply department, frequent complaints of petrol pumps
There was a lack of inappropriate attitude, not showing the supply department, frequent complaints of petrol pumps

धार.
विभागवार समीक्षा की तो कलेक्टर ने खाद्य आपूर्ति विभाग व नापतोल विभाग को संयुक्त रूप से जिले भर के पेट्रोल पंपों की जांच के आदेश दिए। 20 जून से दोनों विभागों ने मोर्चा संभाला और 25 जून तक 14 पेट्रोल पंपों की जांच भी की, लेकिन एक भी पंप पर खामी नजर नहीं आई। जबकि कम पेट्रोल, डीजल देने, मिलावट करने जैसी शिकायतें मिल रही है। नापतोल अफसर के अनुसार अब तक जांच गए पंप पर कम पेट्रोल या डीजल देने जैसी कोई समस्या नजर नहीं आई, जबकि आपूर्ति अधिकारी ने भी मिलावट जैसी कारस्तानी से इंकार किया।
बता दें कि पीथमपुर के फकीर मोहल्ला में रहने वाले मो. रइस ने 24 फरवरी 2018 को सीएम हेल्पलाइन पर कम पेट्रोल देने की शिकायत दर्ज कराई थी। इसके निराकरण में नापतोल अधिकारियों ने जांच करते हुए सरकारी लीपापोती कर दी और पंप मालिक को क्लीनचीट दे दी। ऐसे ही धामनोद व धरमपुरी क्षेत्र के कुछ शिकायतकमर्ताओं ने पेट्रोल, डीजल में मिलावट की शिकायत की थी, लेकिन विशेष जांच अभियान के दौरान भी अफसरों को पंपों पर कोई खामी नजर नहीं आ रही है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था विडियो
कुछ ही समय पूर्व सोशल मीडिया पर एक विडियो वायरल हुआ था, जिसमें पंप पर काम करने वाला कर्मचारी कम पेट्रोल देने की तरकीब बता रहा था। इस विडियों में उसने दिन भर की उपरी कमाई का भी जिक्र किया थ, जिसमें उसका व पंप मालिक के हिस्से के बारे में भी बताया था। बावजूद इसके अधिकारी नई तकनिक वाले नोजल का हवाला देते हुए अब इस तरह की किसी कारस्तानी से इंकार कर रहे हैं।
घनत्व से पता चलती है मिलावट
पेट्रोल और डीजल में मिलावट का पता इसकी डेंसिटी(घनत्व) से पता चल जाता है। हालांकि इसमें नियमानुसार छूट होती है, लेकिन बावजूद इसके पंप मालिकों पर मिलावट जैसे आरोप लगते रहते हैं। पेट्रोल की डेंसिटी 700.0 से 750.0 होती है, जिसमें प्लस/माइनस 3.0 की छूट होती है। इसी तरह डीजल की डेंसिटी 800.0 से 850.0 होती है, जिसमें भी प्लस/माइनस 3.0 की छाूट होती है। इससे अधिक वेरिएशन आने पर मिलावट की पुष्टि होती है। बता रहे हैं कि अफसरों के पास घनत्व नापने के जो उपकरण है, वे काफी पुराने हैं और इनका मापदंड पुख्ता नहीं आ रहा है।
किसकी क्या जिम्मेदारी
विशेष जांच अभियान में आपूर्ति अधिकारियों को पंप पर डेंसिटी और स्टॉक चेक करने का अधिकार है। आपूर्ति अधिकारी के अनुसार स्टॉक में पंप मालिक को प्लस/माइनस ४प्रतिशत की छूट होती है। इधर नापतोल अधिकारी को पंप पर कम नाप की जांच करना होती है, जो लगातार किए जाने का दावा कर रहे हैं।
डेंसिटी कम हो तब
मिलावट का पता डेंसिटी से पता चलता है। निर्धारित मापदंड और छूट के अलावा फर्क आने पर सेंप लेते हैं। यदि डेंसिटी बराबर है तो सेंपल की जरूरत नहीं। हमारे पास जो उपकरण है उससे मिलावट जैसी कोई समस्या प्रमाणित नहीं हो रही है। स्टॉक भी सभी पंप पर रजिस्टर में दर्ज आंकड़ों से मिजान खा रहा है।
-आनंद कुमार गोले, प्रभारी जिला आपूर्ति अधिकारी धार


अब तक नहीं
अब तक जितने भी पंप की जांच की, वहां कम नाप जैसी कोई कारस्तानी नजर नहीं आई। जबरन तो किसी का प्रकरण नहीं बना सकते हैं। जो शिकायत मिलती है उसकी मापदंड में जांच की जाती है। आरोप तो लगते रहते हैं।
-आनंद मोहन, नापतोल निरीक्षक धार


अलग से जांच करवालेंगे
जो पंप संदिग्ध हैं और जहां की शिकायत मिलती है उनकी हम एसडीएम स्तर के अधिकारियों से अलग से जांच करवालेंगे।
-दीपक सिंह, कलेक्टर धार

Updated on:
27 Jun 2018 08:06 pm
Published on:
27 Jun 2018 08:06 pm