धार

Breaking News: मंदिर या मस्जिद? 98 दिनों के ASI सर्वे पर हाईकोर्ट का फैसला, भोजशाला मंदिर है, हिंदुओं को मिला पूजा का अधिकार

Dhar Bhojshala Indore High court big Decision: धार की भोजशाला मंदिर है या मस्जिद, हाईकोर्ट ने सुना दिया फैसला...
4 min read
May 15, 2026
dhar Bhojshala indore high court big decision
dhar Bhojshala indore high court big decision (फोटो- Patrika.com)

Dhar Bhojshala: मध्य प्रदेश के धार जिले के भोजशाला विवाद पर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि भोजशाला परिसर एक मंदिर है। कोर्ट ने कहा है कि भोजशाला में हिंदुओं को पूजा करने का अधिकार। कोर्ट ने कहा कि ऐतिहासिक साक्ष्यों को ध्यान रखते हुए यह फैसला सुनाया गया है। जिसके बाद हिंदू संगठनों में उत्साह नजर आया। वे जय श्रीराम और राजा भोज के जयकारे लगाते दिखे। वहीं हाई कोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष का कहना है कि वह कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा।

संस्कृत शिक्षा का मंदिर थी भोजशाला

कोर्ट ने अपने फैसले में बताया कि ASI सर्वे में मिले सबूतों और साक्ष्यों में सामने आया है कि भोजशाला एक मंदिर परिसर है। जो संस्कृत शिक्षा का प्राचीन केंद्र रहा है। यहां हिंदुओं को पूजा करने का अधिकार है। हालांकि कोर्ट ने फिलहाल ASI को सर्वे जारी रखने को कहा है। कोर्ट ने निर्देश दिए कि भोजशाला पर ASI का ही कब्जा रहेगा।

4 साल से कानूनी, ऐतिहासिक और धार्मिक बहस का केंद्र था भोजशाला विवाद

बता दें कि, भोजशाला विवाद पिछले 4 साल से कानूनी, ऐतिहासिक और धार्मिक बहस का केंद्र बना हुआ था। साल 2022 में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस से रंजना अग्निहोत्री और अन्य याचिकाकर्ताओं ने इंदौर हाई कोर्ट में याचिका दायर कर भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करने और हिंदू समाज को पूर्ण पूजा अधिकार देने की मांग की थी।

हाई कोर्ट के फैसले पर देश-प्रदेश की नजर

हाई कोर्ट के निर्देश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) ने साल 2024 में 98 दिनों तक वैज्ञानिक सर्वे कराया। सर्वे रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गई और 6 अप्रैल 2026 से नियमित सुनवाई शुरू हुई, जो 12 मई तक चली। पांच याचिकाओं, एक अपील और तीन इंटरवेंशन आवेदनों पर सुनवाई के बाद डबल बेंच ने आज तक के लिए फैसला सुरक्षित रख लिया था। इंदौर हाई कोर्ट के इस फैसले पर देश-प्रदेश की नजरें टिकी हुई थीं।

हिंदूू पक्ष ने रखा था ये तर्क

हिंदू पक्ष से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन, अधिवक्ता विनय जोशी और मुख्य याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने कोर्ट में भोजशाला को मां वाग्देवी का प्राचीन मंदिर बताया था। उन्होंने ASI सर्वे रिपोर्ट, ऐतिहासिक दस्तावेज, शिलालेख और स्थापत्य संरचनाओं का हवाला देते हुए कहा था कि, परिसर में मंदिर स्वरूप के स्पष्ट प्रमाण हैं। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि, ब्रिटिशकालीन गजेटियर और इतिहासकारों के अभिलेखों में भोजशाला को मां सरस्वती का मंदिर और विद्या केंद्र बताया गया। परिसर में मिले संस्कृत और नागरी लिपि के शिलालेखों को भी हिंदू पक्ष ने महत्वपूर्ण साक्ष्य बताया।

मुस्लिम पक्ष ने ASI सर्वे पर उठाए सवाल

वहीं, दूसरी तरफ मुस्लिम पक्ष की तरफ से सीनियर एडवोकेट शोभा मेनन, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता सलमान खुर्शीद और अधिवक्ता तौसिफ वारसी ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए ASI सर्वे रिपोर्ट और ऐतिहासिक व्याख्याओं पर सवाल उठाए थे। सलमान खुर्शीद ने कहा था कि, सर्वे के दौरान उपलब्ध कराई गई तस्वीरें और वीडियोग्राफी स्पष्ट नहीं थीं। उन्होंने ये भी कहा कि, अयोध्या मामले की तरह यहां किसी स्थापित मूर्ति की उपस्थिति नहीं है। मुस्लिम पक्ष ने ये तर्क भी दिया कि, परिसर लंबे समय से कमाल मौला मस्जिद के रूप में उपयोग में रहा है। मौजूदा व्यवस्था सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए की गई थी।

धार्मिक स्वरूप तय करने के अधिकार पर बहस

मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में ये तर्क भी दिया कि, किसी विवादित स्थल का धार्मिक स्वरूप तय करने का अधिकार सिविल कोर्ट को है, जबकि ये याचिका हाई कोर्ट में अनुच्छेद 226 के तहत दायर की गई थी। दूसरी तरफ हिंदू पक्ष ने संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत पूजा-अर्चना के अधिकार का हवाला देते हुए परिसर में नियमित पूजा की अनुमति और नमाज पर रोक लगाने की मांग की थी।

भोजशाला फैसला एक नजर में

- भोजशाला परिसर मंदिर है। सर्वे से साफ हो गया है
- आवेदन किए जाने पर मस्जिद के लिए सरकार धार में ही कही
ं और जमीन अलॉट करें।
- केंद्र सरकार मूर्ति वापस लाने के लिए करे प्रयास।
- भोजशाला का कब्जा रहेगा ASI के पास

धार-भोजशाला मामले पर वकील विष्णु शंकर जैन कहते हैं-

'इंदौर हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिसमें ASI के 7 अप्रैल, 2003 के आदेश को आंशिक रूप से रद्द कर दिया गया है। इसके अलावा, कोर्ट ने हिंदू पक्ष को पूजा करने का अधिकार दिया है और भोजशाला परिसर को राजा भोज का माना है। लंदन के एक म्यूजियम में रखी मूर्ति को वापस लाने की हमारी मांग के संबंध में, कोर्ट ने सरकार को इस अनुरोध पर विचार करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि मुस्लिम पक्ष भी सरकार के सामने अपने विचार रखने के लिए स्वतंत्र है। साथ ही, कोर्ट ने सरकार से मुस्लिम पक्ष को कोई दूसरी जमीन देने पर विचार करने को कहा है। कोर्ट ने हमें पूजा-पाठ करने का अधिकार दिया है और सरकार को इस जगह के इंतजाम की देखरेख करने का निर्देश दिया है। ASI का पिछला आदेश, जिसमें नमाज पढ़ने का अधिकार दिया गया था, उसे पूरी तरह से रद्द कर दिया गया है। अब से, वहां केवल हिंदू पूजा ही होगी…'

बरसों से था इंतजार

हिंदू पक्ष जो बरसों से संघर्ष करते हुए फैसले का इंतजार कर रहा था, आज उत्साहित है। कोर्ट के फैसले का हम सम्मान करते हैं।

-हेमंत, महाप्रबंधक, भोज उत्सव समिति धार

बता दें कि आज शुक्रवार 15 मई को सुबह से ही फैसला आने की स्थिति को देखते हुए धार कलेक्टर राजीव रंजन मीना और एसपी सचिन शर्मा लगातार स्थिति की मॉनिटरिंग कर रहे थे। दोनों अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और कोर्ट के फैसले को सम्मानपूर्वक स्वीकार करने की अपील की थी। इस पुलिस प्रशासन ने साफ कहा है कि, सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट करने वालों और शांति व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च भी किया जा रहा है।

-खबर लगातार अपडेट की जा रही है।

Updated on:
15 May 2026 03:59 pm
Published on:
15 May 2026 02:44 pm