
Dhar news: एमपी के धार जिले में ऐतिहासिक भोजशाला मामले में अब सबकी निगाहें गुरुवार 29 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली संभावित सुनवाई पर टिकी है। हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली मुस्लिम पक्ष की याचिका पर करीब ढाई महीने बाद सुनवाई की तारीख आई है, लेकिन मंगलवार तक मामला सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई सूची में शामिल नहीं हुआ था। बुधवार को केस सूचीबद्ध होने की उम्मीद है। ऐसे में गुरुवार को सुनवाई होती है या मामला आगे बढ़ता है, इस पर सभी की नजरें लगी है। सुनवाई नहीं होने की स्थिति में संरक्षित परिसर में नमाज की मौजूदा अनुमति अगली तारीख तक बढ़ाए जाने की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि, इस संबंध में अंतिम स्थिति अदालत के आदेश से ही स्पष्ट होगी। इधर, भोजशाला परिसर में मंगलवार को नियमित सत्याग्रह जारी रहा। इसी दौरान शारदीय नवरात्र के अवसर पर आयोजित नौ दिवसीय दुर्गा सप्तशती पाठ की हवन और पूर्णाहुति के साथ संपन्नता हुई। आयोजन में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना और आरती की। न्यायालय में सुनवाई की प्रतीक्षा के बीच धार्मिक गतिविधियों और सत्याग्रह के चलते भोजशाला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में रही।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) के मौजूदा निर्देशों के अनुसार, मंगलवार को भोजशाला परिसर में हिंदू पक्ष को पूरे दिन पूजा-अर्चना की अनुमति है, जबकि शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय परिसर के पिछले हिस्से, सर्वे नंबर 612 में दोपहर के समय नमाज अदा करता है। अन्य दिनों में भी स्थल पर धार्मिक दर्शन-पूजन की गतिविधियां होती हैं। मां वाग्देवी के प्राकट्य स्थल के दर्शन के लिए शहर और आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने पर मामले की आगे की दिशा को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। यदि सुनवाई नहीं होती है, तो नमाज की अनुमति की अवधि को लेकर अदालत के अगले आदेश का इंतजार रहेगा।
भोजशाला में नियमित सत्याग्रह के साथ विशेष धार्मिक आयोजन हुआ। आयोजकों के अनुसार, महाराजा भोज से जुड़ी करीब 720 वर्ष पुरानी परंपरा को पुनः प्रारंभ करने के उद्देश्य से शारदीय नवरात्र में पहली बार यहां नौ दिवसीय दुर्गा सप्तशती पाठ, पूजा और आरती का आयोजन किया गया। मंगलवार को हवन के साथ इसकी पूर्णाहुति हुई। इस दौरान मां सरस्वती यानी मां वाग्देवी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। मुख्य पुजारी ने मंत्रोच्चार के साथ पूर्णाहुति संपन्न कराई। झांझ, मंजीरे और शंखनाद के बीच मां सरस्वती और राजा भोज के जयकारों से परिसर गूंज उठा। श्रद्धालुओं में आयोजन को लेकर उत्साह नजर आया।