
indore dhar rail line tihi tunnel tower wagon crs inspection, टीही टनल में पहली बार दौड़ा टॉवर वैगन (Source-Patrika)
Indore Dhar Rail Line: मध्यप्रदेश की इंदौर-दाहोद रेल लाइन परियोजना पर लंबे इंतजार के बाद अब ट्रेन को धार तक पहुंचाने की दिशा में अहम कदम आगे बढ़ा है। पीथमपुर के समीप टीही टनल में सोमवार को पहली बार टॉवर वैगन चलाकर ट्रैक की टेस्टिंग की गई। अब तक निर्माण कार्य के चलते जिस टनल का हिस्सा परीक्षण से छूटा हुआ था, वहां भी रेल परिचालन से जुड़ी तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। टीही से धार के बीच ट्रैक, विद्युतीकरण और अन्य जरूरी कार्य पूरे होने के बाद रेलवे ने रेल सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) के निरीक्षण की तैयारी तेज कर दी है।
नवंबर के पहले सप्ताह में निरीक्षण संभावित है। इसके साथ ही इंदौर से धार के बीच रेल सेवा शुरू होने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, टीही टनल में करीब 2.95 किलोमीटर लंबा ट्रैक बिछाया गया है। यहां बैलास्टलेस ट्रैक सहित विद्युतीकरण से जुड़े कार्य पूरे हो चुके हैं। सोमवार को टॉवर वैगन चलाकर ट्रैक की स्थिति और मजबूती को परखा गया। अब सीआरएस निरीक्षण में टीही से धार तक के रेलखंड, स्टेशनों और सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं की जांच की जाएगी। निरीक्षण के बाद तैयार रिपोर्ट सक्षम स्तर पर भेजी जाएगी। जरूरी मंजूरियां मिलने के बाद ही इस रेलखंड पर यात्री सेवा शुरू करने का रास्ता साफ होगा।
इंदौर-दाहोद रेल लाइन के पहले चरण में टीही से धार तक का काम पूरा करने के लिए रेलवे लंबे समय से जुटा हुआ है। मार्च-अप्रेल में पीथमपुर से धार के बीच टॉवर वैगन चलाकर ट्रैक की टेस्टिंग की गई थी, लेकिन उस समय टीही टनल का काम पूरा नहीं होने से इस हिस्से की जांच नहीं हो पाई थी। अब टनल में ट्रैक और विद्युतीकरण का काम पूरा होने के बाद यहां भी परीक्षण किया गया है। रेलवे के लिए यह महत्वपूर्ण पड़ाव है, क्योंकि सीआरएस निरीक्षण रेलखंड पर परिचालन शुरू करने से पहले की अहम सुरक्षा प्रक्रिया है। यदि निरीक्षण में सभी जरूरी मानक पूरे पाए जाते हैं और आवश्यक स्वीकृतियां मिल जाती हैं, तो रेल संचालन शुरू करने की दिशा में अगला कदम बढ़ सकेगा।
परियोजना के प्रथम चरण में टीही टनल से धार तक करीब 47 किलोमीटर का रेलखंड तैयार किया गया है। इस मार्ग पर पीथमपुर, सागौर, गुणावद और धार में चार रेलवे स्टेशन बनाए गए हैं। इसके अलावा ट्रैक पर 40 से अधिक पुल-पुलियों का निर्माण किया गया है। रेलवे ने इस हिस्से में पटरियां बिछाने के साथ सिग्नलिंग, विद्युतीकरण और अन्य तकनीकी कार्य भी किए हैं। अब परियोजना का यह चरण अंतिम दौर में है। सीआरएस निरीक्षण से पहले की जा रही टेस्टिंग को इसी तैयारी का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
Published on:
26 Oct 2026, 11:30 PM IST
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