MP News: प्रशासन से लेकर आम जनता तक, सबकी निगाहें धार की ऐतिहासिक भोजशाला के बारे में कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, यह फैसला ASI की सर्वे रिपोर्ट और दोनों पक्षों द्वारा उठाई गई आपत्तियों पर आधारित होगा।
Bhojshala ASI Survey Report: केन्द्रीय पुरातत्त्व विभाग के अधीन पुरामहत्व की इमारत भोजशाला के मामले को लेकर हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से वर्ष 2022 में दायर की गई याचिका पर हुए सर्वे की रिपोर्ट पर 16 मार्च को उच्च न्यायालय इंदौर में सुनवाई के लिए तारीख लगी है। गत सुनवाई में सर्वे रिपोर्ट की प्रतिलिपि दोनों पक्षो को दी जा चुकी है। कोर्ट अब इस मामले में रिपोर्ट और दावे-आपत्तियों पर अपना फैसला देगी। कोर्ट के फैसले पर शासन-प्रशासन से लेकर आम लोगों की नजरें टिकी है।
दरअसल, एएसआइ के रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट के फैसले से ही भोजशाला का वास्तविक धार्मिक स्वरूप तय होगा। वर्तमान में इस इमारत को हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्ष अपने-अपने समुदाय का अधिकार बताते आए है। इन स्थितियों में प्रति मंगलवार दर्शन-पूजा हिंदू पक्ष और शुक्रवार को नमाज मुस्लिम पक्ष द्वारा अदा की जा रही है। भोजशाला की मुक्ति को लेकर कई दशकों से हिंदू संगठन आंदोलनों के माध्यम से लड़ाई लड़ रहा है। वहीं हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने कोर्ट में याचिका लगाकर इसे निर्णायक स्थिति में पहुंचा दिया है। (MP News)
16 मार्च को उच्च न्यायालय की डबल बेंच में मामले की सुनवाई होगी। 45वें नंबर पर सुनवाई होना है। कोर्ट में सोमवार को भी फैसला आने की उम्मीदें कम है। दरअसल मुस्लिम पक्ष द्वारा एएसआई के सर्वे के दौरान के वीडियोग्राफी साक्ष्य मांगे गए हैं। वीडियोग्राफी साक्ष्य मिलने के बाद मुस्लिम पक्ष द्वारा आपत्ति पेश की जाएगी। मुस्लिम पक्ष के सर्वे के दौरान मौजूद रहे कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी के अब्दुल समद का कहना है कि एएसआइ की रिपोर्ट में सर्वे के दौरान की कई वस्तुओं का उल्लेख नहीं किया गया है। हम वीडियोग्राफी के आधार पर उसे प्रमाणित करके कोर्ट के समक्ष पक्ष रखेंगे।
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से दायर याचिका में उत्त्वच न्यायालय के आदेश से ही केन्द्रीय पुरातत्व विभाग द्वारा 98 दिनों तक दोनों पक्षों की मौजूदगी में भोजशाला का सर्वे किया था। सर्वे रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गई थी, जिसमें सुप्रीम कोर्ट की ओर से आदेश पारित करने को लेकर रोक थी, जिसे 22 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला में अखंड पूजा से संबंधित आवेदन की सुनवाई के दौरान उच्ब न्यायालय को मामले में जल्द सुनवाई के लिए आदेशित किया था।
सर्वे रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद हिंदू समाज में खासा उत्साह है। दरअसल, सर्वे रिपोर्ट में यह स्पष्ट दर्शाया गया है कि वर्तमान में भोजशाला में मौजूद करीब 186 स्तंभ सनातनी संस्कृति से जुड़े हुए है। वहीं शिलालेखों पर अंकित चित्र और श्लोक हिंदू संस्कृति का प्रमाण है। एक स्थान पर परिजात मंजरी नाट्य का उल्लेख मिला है। यह परमार वंशकालीन नाट्य रहा है। इस तरह खुदाई में मिली मूर्तियां सहित अन्य साक्ष्यों ने उत्साह का वातावरण बना रखा है।
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के टीम लीडर हरीशंकर जैन, राष्ट्रीय अध्यक्ष रंजना अग्निहोत्री और अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन के नेतृत्व में लगाई गई भोजशाला याचिका में हमारी मूल मांग उसका धार्मिक स्वरुप तय करने को लेकर थी। इस आधार पर ही सर्वे के आदेश हुए थे। सर्वे रिपोर्ट से हम संतुष्ट हैं। हिंदू समाज की आस्था और विश्वास का दस्तावेज सर्वे रिपोर्ट है। जिसमें सनातन संस्कृति के गौरवशाली इतिहास साक्ष्य के रूप में मिले हैं। सत्य की जीत जल्द होगी। - आशीष गोयल, याचिकाकर्ता हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस धार
सर्वे रिपोर्ट में काफी बातों का उल्लेख नहीं किया गया है। वीडियोग्राफी साक्ष्य प्राप्त करने के बाद हम अपनी बात रखेंगे। हम उन आवेदनों और दस्तावेजों को भी कोर्ट के समक्ष रखेंगे जिसमें हमने बताया है कि दशकों से इमारत के अंदर चीजें प्लॉट की जा रही है। 1903 का सर्वे रिपोर्ट और इसके पूर्व ही याचिकाओं में एएसआइ के जवाब सहित पुख्ता तैयारियों के साथ मुस्लिम पक्ष की बात रखी जाएगी। - अब्दुल समद, कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी धार (MP News)