पुलिस ने भीड़ को उकसाने के आरोप में बीजेपी नेता और सरपंच रमेश जूनापानी को हिरासत में लिया है। साथ ही, पुलिस ने 4 अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है।
धार/ मध्य प्रदेश के धार जिले के बोरलई गांव में बुधवार को हुई दिल दहला देने वाली मॉब लिंचिंग की घटना के बाद अब पुलिसिया कार्रवाई शुरु हो गई है। पुलिस ने भीड़ को उकसाने के आरोप में बीजेपी नेता और सरपंच रमेश जूनापानी को हिरासत में लिया है। साथ ही, पुलिस ने 4 अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है। घटना के बाद पुलिस की अब तक की जांच में 5 पुलिस कभी ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोपी पाए गए, जिन्हें तत्काल सस्पेंड कर दिया गया है।
सरकार के मंत्रियों ने कही ये बात
मामले को संज्ञान में लेते हुए कमलनाथ सरकार के मंत्री पीसी शर्मा ने ऐलान किया है कि, घटना की पूरी जांच का जिम्मा SIT को सौंपा जाएगा। इसमें दोषी पाए जाने वाले पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने पीड़ितों को आश्वासन देते हुए कहा कि, मॉब लिंचिंग रोकने के लिए मध्य प्रदेश में कानून लागू किया जाएगा। वहीं, स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट मॉबलिंचिंग का शिकार हुए घायल पीड़ितों से मिलने इंदौर के चोइथराम अस्पताल पहुंचे, जहां उन्होंने पीड़ितों का हालचाल जाना, साथ ही उन्हें ये आश्वासन भी दिया कि, उनके साथ हुई बरबरता की कड़ी जांच की जाएगी। सिलावट ने कहा कि, घटना मानवता को शर्मसार करने वाली है। सभी पीड़ितों का इलाज प्रदेश सरकार कराएगी। साथ ही, मृतक के परिवार को 2 लाख की आर्थिक मदद दी जाएगी।
वारदात के समय मौके पर था जूनापानी
धार में हुई मॉब लिंचिंग की वारदात के बाद अब सरकार और पुलिस प्रशासन काफी सतर्क नजर आ रहा है। दड़ादड़ गिरफ्तारियों और कार्रवाई का सिलसिला चल रहा है। मामले की जांच के बाद पुलिस ने बोरलई गांव के सरपंच रमेश जूनापानी को हिरासत में लिया है। इसकी पुष्टी धार के एसपी आदित्य प्रताप सिंह ने करते हुए बताया कि, जांच में सामने आया है कि, घटना के वक्त जूनापानी मौके पर मौजूद था। बीजेपी नेता के ऊपर भीड़ को उकसाने का भी आरोप है। इससे पहले एसपी की स्पेशल टीम द्वारा 3 आरोपियों को गिरफ़्तार किया था। आरोपियों से अब पूछताछ की जा रही है। मामले को लेकर अब तक थाना प्रभारी समेत सब इंस्पेक्टर और 3 अन्य पुलिसकर्मी निलंबित कर दिये गए हैं।
डीजीपी ने घटना का बड़ा दोषी पुलिस को माना
डीजीपी (DGP) वीके सिंह ने इस भी घटना का दोषी पुलिस को ही माना है। उन्होंने कहा कि, मॉब लिंचिंग की ये घटना बेहद दुःखद है। इंदौर दौरे पर आए डीजीपी ने घटना दोषी भीड़ के साथ साथ पुलिस को भी ठहराया। उन्होंने कहा कि, भीड़ में शामिल लोगों का दोष ये है कि, इस भयावह घटना को रोकरने के बजाय उसका वीडियो बनाते रहे। किसी ने भी आक्रोशित लोगों को रोकने की कोशिश नहीं की। वीके सिंह ने सख्त लफ्जों में कहा कि, मामले में अन्य जितने भी पुलिसकर्मी दोषी पाए जाएंगे उनपर भी कार्रवाई की जाएगी।
ये है पूरा मामला
मामले की जांच में सामने आया कि, इंदौर जिले के श्योपुर खेड़ा के विनोद मुकाती कुछ समय पहले उज्जैन जिले के 5 साथियों के साथ खिड़किया, बोरलई और आसपास के गांवों से मजदूर लेने आए थे। अकसर ठेकेदार मजदूरों को परमनेंट काम से जोड़े रखने के लिए एडवांस पैसे दे देते हैं। यहां भी इन मजदूरों ने ठेकेदार से एडवांस में पैसे ले रखे थे। इन मजदूरों ने एडवांस में 50-50 हजार रुपए ले रखे थे। लेकिन, मजदूरी किए बिना ही ये मजदूर अपने गांव भाग निकले। जब विनोद मुकाती ने उन्हें काम न करने पर पैसे लौटाने की बात कही, तो मजदूरों ने पैसे देने के लिए अपने गांव बुलाया। जब विनोद और उसके अन्य साथी गांव पहुंचे तो मजदूरों उन पर पत्थरों से हमला कर दिया। जान बचाने के लिए जब विनोद और उनके साथी भागने लगे तो, हमलावरों ने गांव में अफवाह उड़ा दी कि, ये बच्चा चुराने आए हैं। इस पर भीड़ भड़क उठी और संदिग्ध लोगों को लाठ डंडों और पत्थरों से पीटने लगी। यही नहीं घायलों की कार में आग भी लगा दी। इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई, वहीं अन्य 6 घायल हो गए।