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भोजशाला सरस्वती मां का मंदिर, 1995 से 2026 तक ऐसे चली कानूनी जंग

MP high court verdict on bhojshala: भोजशाला पर विवाद 1902 में शुरू हुआ था, लेकिन कानूनी लड़ाई 1995 में शुरू हुई। आइए देखते हैं कि 1995 से 2026 तक इस मामले में क्या हुआ।

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धार

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Akash Dewani

May 15, 2026

MP high court verdict on bhojshala case 1995 to 2026 timeline

bhojshala case 1995 to 2026 timeline (फोटो- Patrika.com)

MP high court verdict on Bhojshala:मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शुक्रवार को लंबे समय से चले आ रहे भोजशाला विवाद को लेकर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि भोजशाला परिसर एक मंदिर है और यहां हिंदुओं को पूजा करने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि ऐतिहासिक साक्ष्यों को ध्यान रखते हुए यह फैसला सुनाया गया है। जिसके बाद हिंदू संगठनों में उत्साह नजर आया। वे जय श्रीराम और राजा भोज के जयकारे लगाते दिखे। वहीं हाई कोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष का कहना है कि वह कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा। भोजशाला पर विवाद 1902 में शुरू हुआ था, लेकिन कानूनी लड़ाई 1995 में शुरू हुई। आइए देखते हैं कि 1995 से 2026 तक इस मामले में क्या हुआ।

1995 से लेकर 2026 तक क्या-क्या हुआ?

1995- हिंदू संगठनों ने भोजशाला में पूजा करने और बसंत पंचमी पर्व पर अधिकार की मांग
को लेकर आंदोलन शुरू किया। विवाद को बढ़ता देख प्रशासन ने मंगलवार को हिन्दुओं को पूजा करने और मुस्लिमों को शुक्रवार के दिन नमाज पढ़ने की अनुमति दी। यह व्यवस्था कई सालों तक विवादों का आधार भी बनी।

1997- तत्कालीन दिग्विजय सिंह सरकार ने कानून व्यवस्था को संभालने के लिए भोजशाला में आम लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके कुछ समय बाद कुछ शर्तों के बाद प्रवेश की अनुमति दी गई। कांग्रेस सरकार ने ये भी फैसला लिया था कि भोजशाला परिसर में सुरक्षा बलों की तैनाती की जाएगी और सेंसिटिव दिनों में धारा 144 लागू किया जाएगा।

2003- विवाद राजनीतिक मुद्दा बना। एमपी विधानसभा चुनाव के दौरान भोजशाला मुक्ति आंदोलन भी हुआ। हिन्दू संगठनों ने मांग की कि भोजशाला को मंदिर मानकर उन्हें पूर्ण अधिकार दिया जाए। इसी दौरान भोजशाला परिसर को ASI संरक्षित स्मारक घोषित किया गया। वहीं, 18 फरवरी को धार्मिक हिंसा और विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। इसी के बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया।

2013 से 2016- इस दौरान भी बसंत पंचमी की पूजा और शुक्रवार की नमाज साथ पढ़े जाने को लेकर विरोध प्रदर्शन देखने को मिला जहां पुलिस को फायरिंग और लाठीचार्ज करना पड़ा। इसी समय अंतराल में हिंदू संगठनों और भोज उत्सव समिति ने कोर्ट में याचिकाएं दायर की। याचिकाओं में भोजशाला को पूर्णतः मंदिर घोषित करने की मांग की गई थी।

2022- हाईकोर्ट में रंजना अग्निहोत्री और हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से याचिकाएं दायर की गई। इन याचिकाओं में ये मांगे की गई:-

  • हिन्दुओं को पूर्ण पूजा का अधिकार
  • नमाज पर रोक
  • ट्रस्ट का गठन
  • वाग्देवी की प्रतिमा वापस लाना

2024- हाईकोर्ट ने ASI को 98 दिन का वैज्ञानिक सर्वे का आदेश दिया जिसका सुप्रीम कोर्ट ने भी समर्थन किया था।

जनवरी 2026- सुप्रीम कोर्ट ने हिंदुओं को बसंत पंचमी पर दिनभर पूजा करने की अनुमति दी।

अप्रैल-मई 2026- हाईकोर्ट ने अप्रैल महीने में रोजाना सुनवाई करने की बात कही। मामले में हिंदू और मुस्लिम के अलावा जैन धर्म के लोगों ने भी याचिका दायर की और इसे जैन गुरुकुल और माता अंबिका का मंदिर बताया था। कोर्ट ने तीनों पक्ष के तर्कों को सुना और 12 मई को फैसला सुरक्षित रखा।

15 मई 2026- हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने हिंदू पक्ष के पक्ष में फैसला सुनाया। हिंदू संगठनों में जश्न मनाया। वहीं, मुस्लिम पक्ष नेहाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज करने की बात कही।