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हिंदुओं के इस पक्ष से मजबूत हुआ भोजशाला के मंदिर होने का दावा, हाईकोर्ट ने 230 पन्नों में सुनाया फैसला

Bhojshala Verdict: 6 अप्रैल से लगातार चल रही थी भोजशाला मामले की हाईकोर्ट में सुनवाई, हाईकोर्ट ने भोजशाला को माना मंदिर, नमाज की अनुमति निरस्त की।

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धार

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Shailendra Sharma

May 15, 2026

dhar bhojshala

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Bhojshala Verdict: मध्यप्रदेश के धार की भोजशाला को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने बड़ा फैसला सुनाते हुए भोजशाला को वाग्देवी का मंदिर माना है। 6 अप्रैल से लगातार हाईकोर्ट में भोजशाला मामले को लेकर सुनवाई हो रही थी और शुक्रवार को कोर्ट ने बड़ा फैसला लेते हुए भोजशाला को मंदिर माना। हाईकोर्ट ने 230 से अधिक पेज की रिपोर्ट में ये फैसला दिया है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि ऐतिहासिक साक्ष्यों को ध्यान में रखा गया है, भोजशाला संस्कृत शिक्षा का केन्द्र था। कोर्ट के फैसले के बाद हिंदू संगठनों में जश्न का माहौल है और वो खुशियां मना रहे हैं।

इस पक्ष से मजबूत हुआ मंदिर होने का दावा

हाईकोर्ट के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने हिंदू, मुस्लिम और जैन तीनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद भोजशाला के मंदिर होने का फैसला सुनाया है। अपने फैसले में हाईकोर्ट ने कहा कि हमने भोजशाला पर हिंदू पूजा-अर्चना की निरंतरता और राज भोज से जुड़े ऐतिहासिक साहित्य को देखा जिससे भोजशाला के देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर के अस्तित्व का संकेत देता है।

हाईकोर्ट ने फैसले के प्रमुख बिंदु

  • मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने घोषणा की कि भोजशाला का विवादित ऐतिहासिक स्थल देवी सरस्वती (वाग्देवी) को समर्पित एक मंदिर है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस' और अन्य लोगों द्वारा दायर रिट याचिकाओं को स्वीकार करते हुए जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने कहा कि हमने इस स्थल पर हिंदू पूजा-अर्चना की निरंतरता को नोट किया।
  • हाईकोर्ट ने कहा कि हम यह निष्कर्ष दर्ज करते हैं कि इस जगह का ऐतिहासिक साहित्य इसे राजा भोज से जुड़े संस्कृत सीखने के केंद्र के रूप में स्थापित करता है, यह धार में देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर के अस्तित्व का संकेत देता है, इसलिए इस क्षेत्र का धार्मिक स्वरूप देवी वाग्देवी सरस्वती के मंदिर वाली भोजशाला के रूप में माना जाता है।
  • कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा 2003 में पारित एक आदेश को उस हद तक रद्द किया, जिस हद तक उसने परिसर के भीतर हिंदुओं के पूजा करने के अधिकारों को प्रतिबंधित किया और मुस्लिम समुदाय को वहां नमाज की अनुमति दी थी।
  • मुस्लिम समुदाय के धार्मिक अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए कोर्ट ने उन्हें धार जिले के भीतर एक मस्जिद के निर्माण के लिए उपयुक्त भूमि के आवंटन के लिए आवेदन जमा करने की अनुमति दी। कोर्ट ने कहा कि यदि ऐसा कोई आवेदन किया जाता है, तो राज्य कानून के अनुसार उक्त आवेदन पर विचार कर सकता है।
  • केंद्र सरकार और एएसआई को भोजशाला मंदिर के प्रशासन और प्रबंधन, तथा परिसर के भीतर संस्कृत सीखने की व्यवस्था के संबंध में निर्णय लेने का निर्देश दिया गया। इस संपत्ति का समग्र प्रशासन एएसआइ के पास ही रहेगा।
  • कोर्ट ने कहा, हर सरकार का यह संवैधानिक दायित्व है कि वह न केवल प्राचीन स्मारकों और उनकी संरचनाओं (जिनमें ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के मंदिर शामिल हैं) का संरक्षण और सुरक्षा सुनिश्चित करे, बल्कि गर्भगृह और आध्यात्मिक महत्व वाली देवी-देवताओं का भी संरक्षण करे।

मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट जाने का किया ऐलान

हाईकोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट जाने का ऐलान कर दिया है। धार शहर काजी वकार सादिक ने कहा कि हम हाईकोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं और इसकी समीक्षा करेंगे, इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में आगे की प्रक्रिया की जाएगी, फिलहाल हमारे अधिवक्ता विस्तृत फैसले का अध्ययन कर रहे हैं।