
Bhojshala Supreme Court Verdict- धार के भोजशाला विवाद पर सुप्रीम कर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने इस संबंध में केंद्र और मध्यप्रदेश सरकारों को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस मुस्लिम पक्ष की उन अपीलों पर जारी किया गया है जिनमें हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें धार जिले के विवादित 11वीं सदी के भोजशाला-कमल मौला परिसर को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर माना गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह इस मामले की जांच करेगा। साथ ही, अंतरिम उपाय के तौर पर, मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज़ पढ़ने के लिए परिसर से सटी एक अलग खुली जगह दी जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि ASI (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) शीर्ष अदालत की अनुमति के बिना कोई भी संरचनात्मक बदलाव न करे।
धार भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष की ओर से दाखिल याचिका में शुक्रवार की नमाज जारी रखने की मांग पर अंतरिम व्यवस्था का प्रस्ताव रखा। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सालिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि ्या भोजशाला परिसर के आसपास नमाजियों के लिए कोई खुली जगह उपलब्ध कराई जा सकती है। सीजेआई सूर्यकांत ने मुस्लिम पक्ष से भी सवाल किया, क्या हम आसपास के एरिया में नमाज की व्यवस्था के आदेश दे सकते हैं? जब तक इस मामले में अतिम फैसला नहीं आ जाता। चीफ जस्टिस ने कहा कि हमने पहले बसंत पंचमी के दिन भी एक अंतरिम व्यवस्था की थी और दोनों पक्षों क पूजा-अर्चना की इजाजत दी थी। हमने वह आदेश तब दिया था जब मामला अदालत में विचाराधीन था, लेकिन अब हाईकोर्ट का फाइनल फैसला आ चुका है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश पर भी हैरानी व्यक्त की, जिसमें लंदन म्यूजिम से देवी सरस्वती की मूर्ति वापस लाने की बात कही गई थी। बेंच ने शामिल जस्टिस जॉयमाला बागची ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए पूछा- कोई संवैधानिक कोर्ट इस तरह का आदेश कैसे दे सकता है?