
Diwali 2026 Maha Sanyog:कार्तिक मास में दीपावली से लेकर देवउठनी ग्यारस तक धर्म, आस्था और ज्योतिषीय योग-संयोगों की विशेष छटा देखने को मिलेगी। वर्ष 2026 में 6 नवंबर को धनतेरस के साथ दीपोत्सव की शुरुआत होगी। 8 नवंबर को आयुष्मान योग, बुधादित्य राजयोग और लक्ष्मी नारायण योग के संयोग में दीपावली मनाई जाएगी। छह दिनों तक चलने वाले इस पर्व क्रम में धनतेरस, यम दीपदान, नरक चतुर्दशी, लक्ष्मी पूजन, गोवर्धन पूजा और भाई दूज के साथ बाजारों और घरों में उत्सव का माहौल रहेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार पर्वो की तिथियों के निर्धारण में प्रदोष काल, उदया तिथि और अरुणोदय काल का विशेष महत्व रहेगा।
पंडित अमर डब्बावाला ने बताया कि 12 महीनों में कार्तिक मास को विशेष प्रधानता दी गई है। कृष्ण पक्ष में करवा चौथ, रमा एकादशी, गोवत्स द्वादशी, धनतेरस, धन्वंतरि जयंती, नरक चतुर्दशी और दीपावली जैसे पर्व मनाए जाते हैं, वहीं शुक्ल पक्ष में अन्नकूट, भाई दूज, सौभाग्य पंचमी, सूर्य षष्ठी, गोपाष्टमी, आंवला नवमी, देवप्रबोधिनी एकादशी, वैकुंठ चतुर्दशी और कार्तिक पूर्णिमा जैसे पर्व आते हैं। धार्मिक परंपराओं के साथ यह समय परिवार, सामाजिक उल्लास और शुभ कार्यों की शुरुआत का भी प्रतीक है।
पंडित गुलशन अग्रवाल के अनुसार, 6 नवंबर शुक्रवार को सुबह 10.31 बजे से त्रयोदशी तिथि प्रारंभ होगी, जो 7 नवंबर को सुबह 10.48 बजे तक रहेगी। प्रदोष काल में त्रयोदशी मिलने के कारण धनतेरस 6 नवंबर को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा का विधान है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शुक्रवार मां लक्ष्मी और शुक्र ग्रह से जुड़ा है। शुक्र को भौतिक सुख-सुविधाओं, वाहन, वैभव और विलासिता का कारक माना जाता है, वहीं कुबेर धन के अधिष्ठाता हैं। ऐसे में धनतेरस और शुक्रवार के संयोग को श्री-कुबेर योग के रूप में विशेष महत्व दिया जा रहा है। इस दिन खरीदारी और धन-संपत्ति से जुड़े शुभ कार्यों के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह रहेगा।
7 नवंबर शनिवार को सुबह 10.48 बजे से चतुर्दशी तिथि शुरू होकर 8 नवंबर को सुबह 11.28 बजे तक रहेगी। प्रदोष काल में चतुर्दशी तिथि मिलने के कारण 7 नवंबर की शाम यमराज के निमित्त दीपदान किया जाएगा। वहीं अरुणोदय और उदया तिथि के आधार पर 8 नवंबर रविवार को नरक चतुर्दशी और रूप चौदस का अभ्यंग स्नान किया जाएगा। 7 नवंबर की शाम और रात में काली चतुर्दशी तथा हनुमान पूजन का भी विधान रहेगा। पं. गुलशन अग्रवाल ने बताया कि 8 नवंबर रविवार को सुबह 11.28 बजे से अमावस्या तिथि शुरू होगी, जो 9 नवंबर सोमवार को दोपहर 12.32 बजे तक रहेगी। दीपोत्सव के लिए प्रदोष वेला और महानिशीथ काल 8 नवंबर को मिलने के कारण इसी दिन मुख्य दीपावली मनाई जाएगी। इस दिन आयुष्मान योग के साथ बुधादित्य राजयोग और लक्ष्मी नारायण योग का संयोग बताया गया है। 9 को देव-पितृ कार्यों के लिए अमावस्या तिथि रहेगी। सोमवती अमावस्या का संयोग भी बनेगा।
10 नवंबर: सूर्योदय से दोपहर 2.01 बजे तक कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा रहेगी। उदया तिथि के आधार पर इसी दिन गोवर्धन पूजा और अन्नकूट महोत्सव मनाया जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण को छप्पन भोग अर्पित करने, गोवर्धन पर्वत और गायों की पूजा करने की । परंपरा है। मान्यता है कि इससे परिवार में सुख-समृद्धि और प्रकृति । के प्रति कृतज्ञता का भाव बढ़ता है।
11 नवंबर: सुबह से दोपहर 3.54 बजे तक द्वितीया तिथि रहेगी। इस दिन भाई दूज और यम द्वितीया का पर्व मनाया जाएगा। बहनें भाइयों को तिलक लगाकर | उनकी सुख-समृद्धि और लंबी आयु। की कामना करेंगी। पंडित अग्रवाल। के अनुसार, सुबह 6.40 से 11.37 बजे तक अमृत सिद्धि और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग भी रहेगा।