
Sankatnashan Ganesh Stotra : सनातन धर्म में 33 कोटि देवी-देवताओं में गणेशजी का प्रथम पूज्य के रूप में सबसे अहम स्थान है। किसी भी शुभ कार्य के पहले सर्वप्रथम उन्हीं की पूजा की जाती है। गणेशजी बुद्धि प्रदान करनेवाले देवता हैं। यहां तक कि उनका वाहन भी मूषक यानि चूहा है जोकि मनुष्य के बाद सबसे ज्यादा बुद्धिमान प्राणी माना जाता है। यही कारण है कि गणेशजी का मूषक से मानसिक तादात्म्य स्थापित हुआ। सभी घरों में गणेशजी पूजा की जाती है। सामान्यत: हम किसी काम के पूरे और सफल होने के लिए उनकी पूजा करते हैं। किसी भीषण संकट में भी गणेशजी की पूजा फलदायी होती है। मान्यता है कि संकटनाशन गणेश स्तोत्र के पाठ से बड़े से बड़ा संकट भी टल सकता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित अरुण बुचके बताते हैं कि गणेशजी के अनेक अलग-अलग स्वरूप भी हैं। विभिन्न स्वरूपों में वे विभिन्न कारक बन जाते हैं। देशभर में कई विख्यात गणेश मंदिर हैं जहां पूजा और दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगी रहती हैं।
गणेशजी की आराधना बेहद सरल है। उनकी प्रसन्नता के लिए अनेक मंत्र, स्त़ोत्र आदि रचे गए हैं। इनमें संकटनाशन गणेश स्तोत्र भी शामिल है। ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि गणेशजी का यह स्तोत्र सिद्ध स्तोत्र है। संकटनाशन गणेश स्तोत्र के नियमित पाठ से बड़े से बड़ा संकट भी टल सकता है।
पंडित नरेंद्र नागर बताते हैं कि जीवन में अचानक कोई बडी परेशानी सामने आ जाए, कोई संकट नजर आने लगे और उससे बचने का कोई उपाय नहीं सूझ रहा हो तब संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करना श्रेयस्कर होगा। गणेशजी की शरण में जाकर विधि विधान से इसका पाठ करने से परेशानी निश्चित रूप से खत्म हो सकती है।
पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के पहले बुधवार या अन्य किसी बुधवार को सुबह स्नान के बाद गणेशजी की पूजा कर उन्हें दूर्वा अर्पित करें। इसके बाद अपनी समस्या दूर करने की प्रार्थना करते हुए संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करें। पाठ की समाप्ति के बाद भी गणेशजी से आसन्न संकट खत्म करने की प्रार्थना करें। संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ नियमित रूप से 40 दिनों तक करें। पाठ करने में बमुश्किल 5 मिनिट लगते हैं पर इसके सुखद परिणाम मिलते हैं। मंत्र जाप या स्तोत्र पाठ में श्रद्धा और विश्वास सबसे आश्वयक अंग हैं। इसके अभाव में सफलता मिलना संभव नहीं है।