केतु ग्रह के अशुभ प्रभाव से गर्भपात, पथरी, गुप्त एवं असाध्य रोग, खांसी, सर्दी, वात और पित्त विकार, पाचन संबंधी रोग आदि होने का अंदेशा रहता है।
केतु के कुपित होने पर जातक के व्यवहार में विकार आने लगते हैं, काम वासना तीव्र होने से जातक दुराचार जैसे दुष्कृत्य करने की ओर उन्मुख हो जाता है। इसके अलावा केतु ग्रह के अशुभ प्रभाव से गर्भपात, पथरी, गुप्त एवं असाध्य रोग, खांसी, सर्दी, वात और पित्त विकार, पाचन संबंधी रोग आदि होने का अंदेशा रहता है।
केतु ग्रह के अशुभ प्रभाव से जातक के जीवन में मुकदमेबाजी, झगड़ा, वैवाहिक जीवन में अशांति, पिता से मतभेद होने की आशंकाएं बढ़ जाती हैं। जन्म कुंडली के लग्न, षष्ठम, अष्ठम तथा एकादश भाव में केतु की स्थिति को शुभ नहीं माना गया है।