
देखते ही देखते चैत्र नवरात्र के 9 दिन खत्म हो गये, 9 दिनों माता के भक्तों ने पूरी श्रद्धा से मां दुर्गा की पूजा आराधना की । अब नवरात्र के अंतिम दिन श्रद्धालु मनोकामना पूर्ति और माता की कृपा पाने के लिए छोटी छोटी कन्याओं को भोजन कराकर कुछ न कुछ भेट भी करते हैं । अगर आप कन्या भोज कराने जा रहे हैं तो ऐसा करना बिलकुल भी नहीं भूले.. शीघ्र मिलेगा आपकी नौ दिवसीय तपस्या का मनवांछित शुभ फल । 13 अप्रैल दिन शनिवार को दुर्गा नवमी के पूजन और कन्या भोज के साथ चैत्र नवरात्रि का समापन भी हो जायेगा ।
कन्या पूजन
वेद शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि में कन्या पूजन करने से व्यक्ति के जीवन की सभी समस्याएं खत्म हो जाती हैं, माँ दुर्गा भी प्रसन्न होकर भक्त की मनोकामना पूरी कर देती हैं । लेकिन जब हमे यह पता ही नहीं हो की इन दिनों किस उम्र की कन्याओं का पूजन करें, उनकों क्या भोजन कराएं और क्या दान दें, अगर बिना सही जानकारी के किसी भी उम्र की कुंवारी कन्या को कन्या मानकर पूजन कर देते है, तो नौ दिनों के व्रत उपवास शुभ फल मिलता ही हैं । अगर मनवांक्षित फल चाहते है तो ऐसे करें कन्याओं का पूजन ।
शास्त्रों में कन्या पूजन निर्धारण
शास्त्रों कहते है कि नवरात्रि में छोटी कन्या अव्यक्त ऊर्जा की प्रतीक है और उसकी पूजा करने से यह ऊर्जा सक्रिय हो जाती है, और इनका पूजन करने से सारे ब्रह्माण्ड की देवशक्तियों का आशीर्वाद पूजन करने वाले को मिलने लगता हैं । धर्म-ग्रंथ - रुद्र-यामल ने नवरात्र में देवी के स्वरूप के पूजन के लिये कन्याओं की आयु का विशेष निर्धारण कर रखा ।
इस उम्र की कन्या का ही करें पूजन
अगर आपने नवरात्र पर्व में उपवास रखा है और उपवास की समाप्ति पर कन्या पजून और उनकों भोजन कराने का संकल्प लिया तो है तो आपकों यह भी पता होगा की कन्या पूजन में केवल उन ही कन्याओं का पूजन करने का विधान हैं जिनकी आयु 2 साल से लेकर 7 साल की ही हो । अगर इस उम्र से ज्यादा उम्र की कन्याओं का पूजन करते हैं तो पूजन करने वाले को किसी भी प्रकार का दैविय लाभ शायद ही मिल सके ।
कन्या को कराएं यह भोजन
नवरात्र में जब की 2 से 7 साल तक की देवी स्वरूप 5, 7 या 11 कन्याओं को केसर युक्त खीर, हलवा, पूड़ी एवं बिना लहसन, प्याज से बनी आलु या कद्दू की सब्जी ही भोजन में खिलाएं ।
कन्याओं को करें यह दान
स्वादिष्ट भोजन कराने के बाद छोटी छोटी देवी स्वरूप कन्याओं के पैरों को लाल मोहर लगाकर पूजन करने के बाद- सफेद रूमाल, ऋतुफल, खिलौने या अन्य उनकी रूची का देने के बाद कुछ दक्षिणा भी अवश्य देकर उनके पैर पड़कर आशीर्वाद लें । माता रानी सभी मनोकामनाएं पूरी कर देंगी ।
***************