
Karwa Chauth 2026 Puja Muhurat: सुबह सरगी के साथ शुरू होने वाली प्रतीक्षा, दिनभर निर्जल उपवास, शाम को सोलह श्रृंगार और फिर आसमान में चांद निकलने का इंतजार… सुहाग, समर्पण और दांपत्य प्रेम का पर्व करवा चौथ आज गुरुवार को उल्लास के साथ मनाया जाएगा। शाम को घरों, कॉलोनियों, मंदिरों और सामूहिक आयोजनों में करवा चौथ की कथा गूंजेगी। चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण होगा। इस बार पर्व के साथ संकष्टी चतुर्थी का संयोग भी है, इसलिए भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व रहेगा। ज्योतिषाचार्य अमर डब्बावला के अनुसार रोहिणी नक्षत्र और वृष राशि में चंद्रमा की स्थिति को भी शुभ माना जा रहा है।
करवा चौथ पर नई दिल्ली के समय अनुसार चंद्रोदय रात 8:13 बजे होने का अनुमान है, जबकि अन्य स्थानों पर समय अलग हो सकता है। जबकि भोपाल में रात 8:23 बजे, मुंबई में रात 8:58 बजे लखनऊ में रात 8:02 बजे, जयपुर में रात 8:24 बजे, अहमदाबाद में रात 8:45 बजे, पटना में शाम 7:50 बजे और बेंगलुरु में रात 8:32 बजे चंद्रोदय होने की संभावना है।
पूजन का शुभ समय शाम 5.38 से 6.56 बजे तक बताया गया है। चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर को रात 1.09 बजे शुरू होकर रात 10.09 बजे तक रहेगी। करवा चौथ को करक चतुर्थी भी कहते हैं। करवा मिट्टी का वह पात्र है, जिससे चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान कार्तिकेय और गणेशजी की पूजा कर अखंड सौभाग्य की कामना करेंगी।
मेष राशि के लिए तांबे के बर्तन या लाल क्रिस्टल ब्रेसलेट, वृषभ के लिए रोज क्वार्ट्ज या चांदी के लक्ष्मी-गणेश, मिथुन के लिए ग्रीन एवेंच्यूरिन या पन्ना पेंडेंट, कर्क के लिए मूनस्टोन रिंग, सिंह के लिए सूर्य पेंडेंट, कन्या के लिए ग्रीन जेड, तुला के लिए ओपल ज्वेलरी और वृश्चिक के लिए तांबे का शिवलिंग उपहार में दिया जा सकता है। धनु के लिए पीतल का दीपक, मकर के लिए पंचधातु नंदी, कुंभ के लिए शंख या तांबे का कलश और मीन राशि के लिए चांदी का शंख अथवा कमल की आकृति वाले उपहार विकल्प हो सकते हैं।
करवा चौथ क्या है? क्यों करवा चौथ पर पूजन की जाती है? इसके बारे में करवा के संबंध को स्पष्ट करना आवश्यक है करवा मिट्टी का पात्र होता है जिसमें जल भरा जाता है। इसके माध्यम से चंद्रमा को तृप्त किया जाता है। अर्थात इस अर्घ्य पात्र को चंद्र के सामने जल छोड़ने से चंद्रमा की प्रसन्नता होती है। सुगंधित द्रव्य सफेद पुष्प और चावल आदि से चंद्र का पूजन किया जाता है। साथ ही साथ गणपति जी की पूजन एवं चौथ माता की पूजन की मान्यता का भी विधान शास्त्र में बताया जाता है। यह करने से करवा चौथ के व्रत की पूर्णता मानी जाती है इसलिए अपने आसपास वैदिक पंडित जी के माध्यम से करवा चौथ की पूजन की विधि संपादित करवानी चाहिए और यह पूजन की विधि प्रति वर्ष होती है क्योंकि प्रतिवर्ष ही पति की दीर्घायु के लिए महिलाएं व्रत रखती है।