
हम अनेकों देवी-देवताओं की पूजा करते है। हिंदू धर्म में सभी देवी-देवताओं की अलग-अलग विशेषताएं हैं. उन सभी देवी-देवताओं में भोले बाबा यानि महादेव की अलग ही विशेषता है। कहा जाता है कि सबसे अधिक देवों के देव महादेव के भक्तों की संख्या है.
सबसे अलग हैं भोलेबाबा
अगर हम गौर से देखेंगे तो पता चलेगा देवों के देव महादेव सभी देवी-देवताओं से हटकर भी हैं। भगवान शिव का रौद्र और सौम्य रूप दोनों ही सुप्रसिद्ध है. सबसे ज्यादा जिस भगवान शिव को हम जानते हैं, उसका हिन्दू ग्रंथों में विस्तार पूर्वक वर्णन किया गया है। वो है गले सर्पों का माला, जटा से निकलती गंगा की धार, पूरे शरीर में भस्म लगाए भगवान शिव शेर की खाल वाले कपड़े धारण किये हुए हैं।
भगवान शिव क्यों पहनते हैं शेर की खाल
शिव पुराण के अनुसार, एक बार भगवान शिव ब्रह्मांड का भ्रमण कर रहे थे। उस दौरान ने एक जंगल से जा रहे थे। जिस जंगल से भोले शंकर गुजर रहे थे, उस जंग ऋषि-मुनि का परिवार रहता था। भगवान शिव को ये अंदेशा नहीं था कि वे बिना कोई वस्त्र धारण किए ही जंगल से जा रहे हैं।
शिव पुराण के अनुसार, भोले शंकर की आकर्षक छवि को देखकर ऋषि-मुनि की धर्मपत्नियां उनकी तरफ आकर्षित होने लगी और उन्हें निहारने में लगीं. इस ओर जब ऋषि-मुनियों का ध्यान गया तो वे काफी क्रोधित हो गए। ऋषि-मुनियों को लगा कि उनकी पत्नियां मार्ग से भटक रही हैं। ऋषि-मुनियों को काफी क्रोध आ गया और भगवान शिव को दंड देने का प्रण कर लिया।
दंड देने के लिए ऋषि-मुनियों ने भगवान शिव के रास्ते में एक बड़ा सा गड्ढा खोद दिया। उस रास्ते से भगवान शिव जब गुजर रहे थे, तो वो गड्ढे में जा गिरे। इसके बाद ऋषि-मुनियों ने उस गड्ढे में एक शेर को भी छोड़ दिया ताकि वह शेर भगवान शिव को अपना शिकार बना ले।
उसके बाद भगवान भोले शंकर ने शेर को मार कर, उस शेर की खाल को वस्त्र बनाकर धारण कर लिया और गड्ढे से बाहर निकले। ऋषि-मुनियों ने जब भगवान शिव के इस तरह देखा तो वे अचंभित रह गए। बाद में उन्हें एहसास हुआ कि ये कोई सधारण मनुष्य नहीं बल्कि साक्षात देवों के देव महादेव हैं। बाद में उन लोगों ने अपनी गलती की माफी भी मांगी।