
वेद शास्त्रों के अनुसार अगर नवरात्र के नौ दिनों तक अखंड दीपक को जलाने से घर परिवार में सदैव सकारात्मक ऊर्जा बनी रहने के साथ किसी भी सदस्य का जीवन अंधकारमय नही रहता । साथ ही अखंड दीपक के साथ कलश स्थापना भी करने का विधान है जिस घर में नवरात्र के दिनों में कलश की स्थापना होती हैं उस घर के लोग माता की कृपा से हमेशा मिलजुल कर संगठित होकर रहते हैं, एवं मां दुर्गा की कृपा बनी रहती है । अपने घर में ऐसे करें कलश अखंड दीपक की स्थापना ।
स्थापना विधि
शारदीय नवरात्रि दुर्गा पूजा 10 अक्टूबर 2018 बुधवार, दीपक व कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त- सुबह 06:22 से 07:25 तक ।
कलश स्थापना के लिए महत्त्वपूर्ण सामग्री-
1- शुद्ध जल से भरा हुआ मिट्टी, सोना, चांदी, तांबा या पीतल का कलश ।
2- कलावा, अशोक या आम के 5 पत्ते, साबुत चावल,
3- पानी वाला एक नारियल, पूजा सुपारी कलश में डालने के लिए एक सिक्का, कलश के लिए छोटी सी फूल की माला ।
अखण्ड दीपक स्थापना हेतू सामग्री
1- मिट्टी, पीतल या चांदी का बड़ा सा दीपक
2- गाय का शुद्ध घी
3- बत्ती के लिए रूई या लाल सूति कलावा
नवरात्र कलश स्थापना की विधि
कलश स्थापना के लिए सबसे पहले घर के पूजा स्थल को अच्छे से शुद्ध करके एक चांदी या लकड़ी की चौकी या पटा पर लाल कपडा बिछाकर माता की मूर्ति या फोटों को स्थापित करें । अब चौकी की दाहिने तरफ चावल छोटी सी ढेरी लगाकर उस पर कलश को स्थापित करें, कलश में गंगाजल मिला शुद्धजल, थोड़े से चावल, एक पूजा सुपारी और एक सिक्का डालकर 5 आम के पत्ते लगाकर नारियल को रख दें नीचे दिये मंत्र की उच्चारण करते हुए कलश का पूजन कर स्थापित करें ।
कलश स्थापना का मंत्र
कलशस्य मुखे विष्णु कंठे रुद्र समाश्रिताः ।
मूलेतस्य स्थितो ब्रह्मा मध्ये मात्र गणा स्मृताः ।।
कुक्षौतु सागरा सर्वे सप्तद्विपा वसुंधरा ।
ऋग्वेदो यजुर्वेदो सामगानां अथर्वणाः ।।
अङेश्च सहितासर्वे कलशन्तु समाश्रिताः ।।
अर्थ – कलश के मुख में संसार को चलाने वाले श्री विष्णु, कलश के कंठ यानी गले में संसार को उत्पन्न करने वाले श्री शिव और कलश के मूल यानी की जड़ में संसार की रचना करने वाले श्री ब्रह्मा ये तीनों शक्ति इस ब्रह्मांड रूपी कलश में उपस्थित हैं। कलश के बीच वाले भाग में पूजनीय मातृकाएं उपस्थित हैं। समुद्र, सातों द्वीप, वसुंधरा यानी धरती, ब्रह्माण्ड के संविधान कहे जाने वाले चारों वेद (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद) इस कलश में स्थान लिए हैं। इन सभी को मेरा नमस्कार हैं ।
अखण्ड दीपक जलाने का मंत्र
दीपक या दीया वह पात्र है, जिसमें मिट्टी का दीपक, सूत की बाती और तेल या गाय का घी रख कर ज्योति जलाई जाती है ।
मंत्र
दीपज्योति: परब्रह्म: दीपज्योति: जनार्दन: ।
दीपोहरतिमे पापं संध्यादीपं नामोस्तुते ।।
शुभं करोतु कल्याणमारोग्यं सुखं सम्पदां ।
शत्रुवृद्धि विनाशं च दीपज्योति: नमोस्तुति। ।
नवरात्र में दीपक की लौ पूर्व दिशा की ओर रखकर अखंड जलाने से आयु में वृद्धि होती है । दीपक की लौ उत्तर दिशा की ओर रखने से धन लाभ होता है । दीपक की लौ कभी भी दक्षिण दिशा की ओर न रखें, ऐसा करने से जन या धनहानि होती है ।