ऐसे पहचानें अपने पितर को...
पितृ पक्ष 2020 समाप्त होने के साथ ही आज 18 सितंबर शुक्रवार से पुरुषोत्तम मास यानि अधिकमास का प्रारभ हो चुका है। जो 17 अक्टूबर 2020 तक चलेगा। पितरों की अपने लोक वापसी के बाद कई लोगों के मन में विचार आता है कि क्या उनके पितर पुन: जन्म लेकर धरती पर आते हैं? या आते हैं तो क्या उनके घर में भी जन्म लेते हैं और अगर लेते हैं तो यह कैसे पता लगाया जा सकता है कि जिसने हमारे घर जन्म लिया है वह कोई और नहीं हमारे पितर ही हैं।
इस संबंध में पंडित सुनील शर्मा का कहना है कि हां धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आत्मा पुन: जन्म तब तक लेती रहती हैं, जब तक उन्हें पूर्ण मोक्ष प्राप्त नहीं हो जाता। ऐसे में आपके हमारे सभी के पितर भी समय समय पर इस धरती में पुन: जन्म लेते रहते हैं। जबकि कई बार वे अपने ही परिवार में तक पुनर्जन्म लेते हैं। ऐसे में अपने पितर को पहचाना कि उन्होंने आप ही के घर जन्म लिया है, कोई बहुत मुश्किल नहीं तो आसान भी नहीं है।
मान्यता के अनुसार अधिकांश पितर आपने घर परिवार में पुन: जन्म लेना चाहते हैं। मृत्यु के समय आपके पूर्वज की अभिलाषा ही उसे आपके घर में पुनर्जन्म का कारण बनती है। वह आपके पुत्र के रूप में या आपके पुत्र के पुत्र या पुत्री के बच्चे में जन्म ले सकती है। इसके अलावा आपके परिवार या खानदान में भी जन्म ले सकती है। लेकिन यह सभी आपके कर्म पर निर्भर करता है, यदि कर्म बहुत खराब किए हैं तो मानव जन्म न मिलने के कारण अपने पुराने परिवार में ही जन्म नहीं मिल पाता। कुल मिलाकर आपके कर्म से ही आपका प्रारब्ध जुड़ा होता है।
यदि आपके घर जन्म लिया : तो ऐसे पहचानें अपने पितर को...
यदि आपके घर में आपके ही पितर ने जन्म लिया है, तो माना जाता है कि कुछ खास लक्षणों की मदद से उसे पहचाना जा सकता है...
: जो पैदा हुआ है उसके कई लक्षण आपके पितर से मिलते हैं।
: उसका हावभाव जैसे किसी को पुकारना या घर में कहां क्या रखा है आदि चीजें भी उसके पुनर्जन्म का अहसास कराती हैं।
: इसके अलावा यदि आप उस बच्चे के सामने 3—4 फोटो रखें और वह आपके उसी पितर की फोटो को ही छुए, यह भी पितर का आपके घर में जन्म लेने का संकेत देता है।
: खाने में बच्चे की पसंद पितर की पसंद से पूरी तरह से मिलती हो।
: बच्चे का थोड़ा बड़े होने पर अपने पितर वाली जगह पर ही जाकर बैठना।
: बच्चे की हरकतें पितर जैसी ही होना।
: पितर की जहां मृत्यु हुई थी वहां ले जाने पर बच्चे का डरना।