
शास्त्रों के अनुसार, जो प्रदोष व्रत शनिवार के दिन पड़ता है, उसे शनि प्रदोष व्रत कहते हैं। इस बार ये व्रत 7 मार्च को है। प्रदोष व्रत भगवान शिव की महाकृपा पाने का दिन है। कहा जाता है कि शनि प्रदोष व्रत करके कोई भी भक्त अपने मन की इच्छा को बहुत जल्द ही पूरा कर सकता है।
दरअसल, प्रदोष व्रत हर महीने की दोनों पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। शनि प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा शाम के समय सूर्यास्त से 45 मिनट पहले और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद होती है। शनि प्रदोष व्रत में भगवान शिव के साथ-साथ शनि देव की महाकृपा भी प्राप्त होती है।
कहा जाता है कि इस दिन शिव और शनि की एक साथ पूजा करने से शनि की साढ़ेसाती-ढैय्या का दुष्प्रभाव भी दूर हो जाता है। आइये जानते हैं कि शनि प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और शनि की पूजा कैसे करें...
सबसे पहले शनि प्रदोष के दिन सूर्योदय से पहले उठें और स्नान-ध्यान करके हल्के रंग के कपड़े घारण करें। इसके बाद पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का चौमुखा दिया जलाएं और एक दिया शनिदेव के मंदिर में भी जलाएं। ये सब करने के पश्चात सारा दिन मन ही मन ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें।
इसके बाद शाम में प्रदोष काल में भगवान शिव की पंचामृत से स्नान कराएं। पंचामृत से स्नान कराने के बाद शुद्ध जल से स्नान कराएं। ये सब करने के बाद रोली, मोली चावल, धूप, दीप से पूजन करें।
शनि प्रदोष व्रत के नियम और सावधानियां
शनि प्रदोष व्रत के दिन घर और मंदिर में साफ सफाई का ध्यान रखें। इस दिन साफ-सुथरे कपड़े पहनकर ही भगवान शिव और शनि की पूजा करें। व्रत के दौरान मन में किसी तरीके के गलत विचार न आने दें। हरे भरे पेड़-पौधों को ना तोड़ें। घर के सभी लोग आपस में सम्मान पूर्वक बात करें और अपने आप को भगवान शिव और शनि को समर्पण कर दें। ऐसा करने से शिव और शनि की कृपा से आपकी सभी मनोकामना पूर्ण हो जाएगी।