Shardiya Navratri 2019 : Maa Durga ke tantrik mantra jaap : आश्विन मास की नवरात्र में नौ दिनों तक माता के इन विशेष तांत्रिक मंत्रों को जप करने से संतान प्राप्ति सहित अनेक मनोकामनाएं पूरी होने लगती है।
चारों नवरात्रि काल में सबसे महत्वपूर्ण आश्विन शारदीय नवरात्रि के नौ दिन विशेष माने जाते हैं। इन दिनों माँ दुर्गा भवानी की शरण में जाकर कोई भक्त अपनी सभी समस्याओं से हमेशा के लिए छुटकारा पा सकता है। आश्विन मास की नवरात्र में नौ दिनों तक माता के इन विशेष तांत्रिक मंत्रों को जप करने से संतान प्राप्ति सहित अनेक मनोकामनाएं पूरी होने लगती है।
1- संतान प्राप्ति के लिए- अगर संतान सुख चाहते है तो शारदीय नवरात्र में नौ दिन तक नियमित इस मंत्र की एक माला यानी 108 मंत्र सुबह शाम दोनों समय जपना चाहिए। माँ दुर्गा की कृपा से संतान सुख की प्राप्ति होगी।
मंत्र
ॐ सर्वाबाधा वि निर्मुक्तो धन धान्य सुतान्वितः।
मनुष्यो मत्प्रसादेन भवष्यति न संशय॥
2- धन प्राप्ति के लिए - अगर घर का मुखिया या परिवार के अन्य सदस्य धन संबंधी समस्याओं से बुरी तरह परेशान है और अपनी गरीबी को दूर करना चाहते हैं, तो शारदीय नवरात्र में नौ दिन तक माँ दुर्गा के इस मंत्र की एक या तीन माला जरूर जप करें। माँ की कृपा से धन प्राप्ति के अनेक रास्ते मिलने लगेंगे।
मंत्र
ॐ दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः।
स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।।
3- जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्ति के लिए- जीवन मृत्यु यानी बार-बार जन्म लेने और मरने के चक्र से बचना चाहते हैं तो मोक्ष प्राप्ति के लिए शारदीय नवरात्र में नियमित माँ दुर्गा के इस मंत्र का जप करने से मनुष्य जन्म-मृत्यु के बंधन से छुट जाता है।
मंत्र
ॐ सर्वस्य बुद्धिरुपेण जनस्य हृदि संस्थिते।
स्वर्गापवर्गदे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते।।
4- दुःख-कष्टों के नाश के लिए - परिवार में अगर कोई दुःख या कष्ट है तो शारदीय नवरात्र के नौ दिनों तक इस मंत्र का जप सभी सदस्य 108 बार जप करें। कुछ ही दिनों में माँ दुर्गा भवानी की कृपा दिखाई देने लगेगी।
मंत्र
ॐ शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे।
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते।।
5- धन प्राप्ति के लिए - धन के साथ ऐश्वर्य से भरपूर जीवन की कामना है तो शारदीय नवरात्र में माँ दुर्गा भवानी के इस सिद्ध तांत्रिक मंत्र का जप 108 बार दिन में तीन बार रोज करें।
मंत्र
ॐ ऐश्वर्य यत्प्रसादेन सौभाग्य-आरोग्य सम्पदः।
शत्रु हानि परो मोक्षः स्तुयते सान किं जनै।।
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