
वैसे तो भगवान शिव की विधिवत पूजा करनी चाहिए, मगर वैसा नहीं कर पा रहे हैं तो सिर्फ जलाभिषेक या दुग्धाभिषेक से भी महादेव भक्त की भावना को स्वीकार कर लेते हैं। भगवान शिव को शीतल वस्तुएं प्रिय हैं, कच्चा दूध भी शीतलता प्रदान करता है। इसके अलावा दूध का संबंध चंद्रमा से है, चंद्रमा शिवजी के मस्तक पर विराजमान होते हैं। इस कारण शिवजी को दूध अर्पित करने से चंद्रदोष दूर होता है।
साथ ही मान्यता है कि आचरण सही रखकर शिवलिंग पर दूध चढ़ाने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसके अलावा सोमवार को शिवजी की पूजा अर्चना के बाद दूध का दान करने से चंद्रमा मजबूत होता है। साथ ही सोमवार को जल में थोड़ा सा दूध डालकर स्नान करने मानसिक तनाव दूर होता है और चिंता कम होती है।
भगवान शिव की पूजा में कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। विशेष रूप से भगवान शिव को दूध अर्पित करते समय खयाल रखना चाहिए कि वो व्यर्थ न हो और बेहतर है दूध को पात्र समेत ही अर्पित कर दें ताकि कोई और इसका प्रयोग कर सके। साथ ही दूध चढ़ाते समय इसका ध्यान रखना चाहिए …
नमः शंभवाय च मयोभवाय च नमः शंकराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च।।
ईशानः सर्वविध्यानामीश्वरः सर्वभूतानां ब्रम्हाधिपतिर्ब्रम्हणोधपतिर्ब्रम्हा शिवो मे अस्तु सदाशिवोम।।
तत्पुरषाय विद्म्हे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात।।
सोमवार रात को एक साफ पात्र में दूध ले लें। इसमें एक चांदी का सिक्का और थोड़ा सा शहद डालें और इस पात्र को चंद्रमा की रोशनी में रखें। अब इसके सामने बैठकर शिवजी के मंत्र ॐ दारिद्र्य दुःख दहनाय नमः शिवाय का जाप करें। मंत्र जप के बाद इस दूध को प्रसाद के रूप में ग्रहण करें। इससे आर्थिक तंगी और दरिद्रता दूर होगी।