धर्म-कर्म

संयम और त्याग का जीवन जीने से कर्मों का होता क्षय

Apr 21, 2026
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बेंगलूरु

आदिनाथ जैन संघ की ओर से संचालित वी.वी. पुरम स्थित संभवनाथ जिनालय के प्रांगण में अक्षय तृतीया के अवसर पर वर्षीतप के आराधकों का पारणोत्सव भक्तिमय माहौल में संपन्न हुआ।

आचार्य चंद्रयश सूरीश्वर एवं आदि साधु-साध्वी वृंद की निश्रा में आयोजित इस कार्यक्रम में श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। शुभारंभ संभवनाथ अपार्टमेंट से हुआ, जहां आचार्य व चतुर्विध संघ का गाजे-बाजे के साथ भव्य सामैया निकाला गया। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज और जयकारों से पूरा वातावरण धर्ममय हो गया। इसके पश्चात विशेष रूप से निर्मित पारणा नगरी का विधिवत उद्घाटन किया गया, जहां तपस्वियों ने अपना 400 दिन का कठिन तप पूर्ण किया।आचार्य ने कहा कि भगवान महावीर ने केवलज्ञान प्राप्त करने के बाद जैन शासन की स्थापना देवों के बीच नहीं, बल्कि साधु-साध्वी और श्रावक-श्राविका के रूप में चतुर्विध संघ के माध्यम से की। इसके पीछे गहरा संदेश था कि जैन धर्म सत्ता या शक्ति के बल पर नहीं, बल्कि त्याग और तपस्या के बल पर अडिग रहता है। उन्होंने कहा कि भगवान ऋषभदेव की परंपरा में वर्षीतप की आराधना करना शौर्य का काम है। तपस्वियों ने पूरे 14 माह तक संयम और त्याग का जीवन जीकर अपने कर्मों का क्षय किया है, जो संपूर्ण समाज के लिए प्रेरणादायी है। तपस्वियों की सेवा में जुटे रहने वाले विभिन्न संगठनों की सराहना की गई। आचार्य ने ट्रस्ट मंडल, सेवा सर्वोत्तम मंडल और लब्धि मंडल के सदस्यों के समर्पण को अनुकरणीय बताया। विशेष रूप से 10वें वर्षीतप की कठिन आराधना पूर्ण करने वाली साध्वी निधिपूर्णाश्री की अनुमोदना की गई।

संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि महोत्सव के तहत मंगलवार सुबह 9:15 बजे आचार्य का विशेष प्रवचन आयोजित किया जाएगा। मौके पर गौतम सोलंकी, हेमराज जियानी, गौतम बंदामुथा, प्रश्न पिरगल, ललित संघवी, भेरूमल दांतेवाड़िया, मनोहर श्रीश्रीमाल, नरेंद्र गांधी, संतोष परमार, भरत चौहान, कमलेश बोहरा, दिनेश अंदोनी, कैलाश बंदामुथा, कैलाश वेदमुथा आदि उपस्थित रहे।

Updated on:
21 Apr 2026 06:16 pm
Published on:
21 Apr 2026 06:16 pm