धर्म-कर्म

Ganesh Aarti: सुखकर्ता दुःखहर्ता वार्ता विघ्नाची… पढ़ें गणेशजी की प्रसिद्ध आरती

Ganesh Aarti: गणेशजी की बेहद लोकप्रिय मराठी आरती, इसका विस्तृत पाठ कुल 7 कड़ियों का लेकिन 3 कड़ियां ही गाई जाती हैं
2 min read
Sep 14, 2026
ganeshji
गणेशजी फोटो सोर्स : AI Grok

Ganesh Aarti: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के साथ ही आज से गणेशोत्सव की शुरुआत हो चुकी है। भगवान गणेश घर घर में स्थापित हो गए हैं। अब वे अनंत चतुर्दशी तक यहीं विराजमान रहेंगे। 14 सितंबर सोमवार से 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी तक रोज गणेशजी की भक्तिभाव से पूजा की जाएगी। उनकी आर​ती की जाएगी।

घर और भव्य पंडालों में एक आरती जरूर गूंजती है- सुखकर्ता दुःखहर्ता वार्ता विघ्नाची…

यूं तो गणेशजी के अनेक स्तोत्र, मंत्र और आरतियां हैं पर घर और भव्य पंडालों में एक आरती जरूर गूंजती है- सुखकर्ता दुःखहर्ता वार्ता विघ्नाची…। गणेशजी की यह बेहद लोकप्रिय आरती मराठी भाषा में है। माना जाता है कि समर्थ गुरु रामदास स्वामी ने इसकी रचना की थी। इस आरती का विस्तृत पाठ कुल 7 कड़ियों का है हालांकि आमतौर पर 3 कड़ियां ही गाई जाती हैं।

गणेश आरती का प्रचलित एवं संपूर्ण पाठ

आइए जानते हैं सुखकर्ता दुःखहर्ता वार्ता विघ्नाची… गणेश आरती का प्रचलित एवं संपूर्ण पाठ:

गणेशजी की आरती:

सुखकर्ता दुःखहर्ता वार्ता विघ्नाची ।
नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची ॥
सर्वांगी सुंदर उटि शेंदुराची ।
कंठी झटके माळ मुक्ताफलांची ॥१॥

जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती ।
दर्शनमात्रे मनकामना पुरती ॥ध्रु०॥

रत्नखचित फरा तुज गौरीकुमरा ।
चंदनाची उटी कुंकुमकेशरा ॥
हिरेजडीत मुकुट शोभतो बरा ।
रुणझुणती नूपरें चरणीं घागरिया ॥ जय० ॥२॥

माथा मुकुट मणी कानी कुंडले ।
सोंड दोंदावरी शेंदुर चर्चिले ।।
नागबंद सोंड-दोंद मिराविले ।
विश्वरूप तया मोरयाचे देखिले ॥ जय० ॥३॥

चतुर्भुज गणराज बाही बाहुटे ।
खाजयाचे लाडू करुनी गोमटे ।।
सुवर्णाचे ताटी शर्करा घृत ।
अर्पी तो गणराज विघ्ने वारीतो ॥ जय० ॥४॥

छत्रे चामरे तुजला मिरविती ।
उंदीराचे वाहन तुजला गणपती ।।
ऐसा तु कलीयुगी सकळीक पाहसी ।
आनंदे भक्तासी प्रसन्न होसी ॥ जय० ॥५॥

ता ता धिमि किट धिमि किट नाचे गणपती ।
ईश्वर पार्वती कौतुक पाहती ।।
ताल मृदंग वीणा घोर उमटती ।
त्यांचे छंदे करुनी नाचे गणपती ॥ जय० ॥६॥

लंबोदर पीतांबर फणिवरबंधना ।
सरळ सोंड वक्रतुंड त्रिनयना ॥
दास रामाचा वाट पाहे सदना ।
संकटीं पावावें निर्वाणीं रक्षावें सुरवर वंदना
॥ जय ० ॥ ७ ॥

जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती ।
दर्शनमात्रे मनकामना पुरती ॥॥

Updated on:
14 Sept 2026 05:50 pm
Published on:
14 Sept 2026 05:49 pm