1 नवंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Hartalika Teej 2026 : 2 दिन रहेगी हरतालिका तीज, गणेश चतुर्थी से बढ़ी शुभता, जानिए मुर्हूत और पूजा विधि

Hartalika Teej Puja Time And Method : 14 सितंबर को मनाया जाएगा हरतालिका तीज व्रत, शिव पार्वती विवाह से जुड़ी हैं इस व्रत की मान्यताएं
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

भारत

•

image

deepak deewan

•

Updated: 11 Sep 2026, 5:35 PM IST

हरतालिका तीज

हरतालिका तीज - Demo pic फोटो सोर्स : AI Grok

Hartalika Teej 2026 : सनातन धर्म में हरतालिका तीज व्रत का बहुत महत्व है। यह शिव पार्वती विवाह से जुड़ा है। हरतालिका तीज पर सुहागिन महिलाएं और कुंवारी युवतियां व्रत रखकर शिव पार्वती की पूजा करती हैं। मान्यता है कि इससे जहां युवतियों को मनचाहा वर प्राप्त होता है वहीं सुहागिनों के पति की आयु और सौभाग्य में वृद्धि होती है। हरतालिका तीज व्रत भाद्रपद शुक्ल तृतीया को रखा जाता है। इस बार यह तिथि दो दिन 13 सितंबर और 14 सितंबर को पड़ रही है जिससे व्रत को लेकर कुछ भ्रम भी उत्पन्न हो गया है। हालांकि ज्यादातर धर्माचार्य और ज्योतिषी 14 सितंबर को ही हरतालिका तीज व्रत रखने की बात कह रहे हैं। इस दिन गणेश चतुर्थी भी है जिससे व्रत व पूजापाठ की शुभता बढ़ गई है।

ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि हरतालिका तीज पर व्रत रखकर विधिविधान से पूजा पाठ से घर-परिवार की सुख-समृद्धि में भी बढ़ोत्तरी होती है। विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना से यह व्रत रखती हैं। जो युवतियां योग्य और मनपसंद वर चाहती हैं, उन्हें भी यह व्रत करना चाहिए।

पंचांगों के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि इस बार 13 सितंबर की सुबह 7:08 बजे प्रारंभ होगी। यह 14 सितंबर की सुबह 7:06 बजे रहेगी। 14 सितंबर को सुबह सूर्योदय के समय तृतीया तिथि ही रहेगी, इससे उदया तिथि के आधार पर इसी दिन हरतालिका तीज व्रत करना उचित रहेगा। ज्योतिषाचार्य पंडित अरुण बुचके बताते हैं कि 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी भी है। इससे हरतालिका व्रत का महत्व और ज्यादा हो गया है। शास्त्रों में भी तीज का व्रत चतुर्थी के साथ वाले दिन करने का महत्व बताया गया है।

पंडित नरेंद्र नागर के अनुसार तृतीया जहां पार्वतीजी की तिथि है वहीं चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेशजी हैं। माता पार्वती के तीज व्रत और गणेशजी के चतुर्थी व्रत के एक ही दिन आने से शुभता बढ़ गई है।

पूजा के लिए मिट्टी या रेत से भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमाएं बनाती हैं

हरतालिका तीज सबसे कठिन व्रतों में से एक है। मान्यता है कि देवी पार्वती ने शिवजी को पति के रूप में पाने के लिए यह व्रत किया था। हरतालिका पर कई महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। पूजा के लिए मिट्टी या रेत से भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमाएं बनाई जाती हैं। देवी पार्वती का श्रृंगार कर उन्हें लाल चुनरी, लाल चूड़ियां जैसी सुहाग की वस्तुएं चढ़ाती हैं।

हरतालिका तीज पूजा के शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:32 बजे से सुबह 05:19 बजे तक
प्रातःकाल मुहूर्त: सुबह 06:05 बजे से सुबह 07:06 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:41 बजे
प्रदोष काल मुहूर्त: शाम 06:27 बजे के बाद
(संध्या के समय शिव-पार्वती की पूजा का उत्तम समय)