
अलवर के बाजारों में सजी गणेश प्रतिमाएं (फोटो - पत्रिका)
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी पर 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी मनाई जाएगी। इसी के साथ दस दिवसीय गणेश महोत्सव शुरू होगा। शहर में पर्व को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। घरों और पांडालों में विधि-विधान से भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। श्रद्धालु पूजन-अर्चन कर सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। शुभ मुहूर्त होने के कारण इस दिन कई लोग शुभ एवं मांगलिक कार्य भी करेंगे। गणेशोत्सव को लेकर बाजारों में भी रौनक बढ़ने लगी है।
पर्व की तारीख नजदीक आने के साथ ही अलवर के बाजारों में मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाओं की बिक्री शुरू हो गई है। होप सर्कस सहित अन्य बाजारों में अलग-अलग आकार और स्वरूप की प्रतिमाएं उपलब्ध हैं। मूर्ति विक्रेता सोनू ने बताया कि प्रतिमाएं गुजरात सहित अन्य शहरों से मंगवाई गई हैं। इनकी कीमत 100 रुपए से लेकर 1,000 रुपए तक है।
इस बार वस्त्र धारण किए हुए बड़े आकार की गणेश प्रतिमाएं लोगों को विशेष रूप से पसंद आ रही हैं। घरों में स्थापना के लिए छोटे आकार की प्रतिमाओं की भी मांग है। पर्व नजदीक आने के साथ बाजार में खरीदारी बढ़ने लगी है।
पं. तपेश अवस्थी के अनुसार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी सोमवार को मध्याह्न काल में होने के कारण इसी दिन गणेश चौथ मनाई जाएगी। बंशीधर पंचांग के अनुसार गणेश पूजन का श्रेष्ठ समय सुबह 11:09 बजे से दोपहर 1:36 बजे तक रहेगा। इसमें दोपहर 1:21 बजे तक वृश्चिक लग्न का समय विशेष रूप से श्रेष्ठ माना गया है।
पंचांग के अनुसार इस दिन रवि योग, इंद्र योग और ब्रह्म योग भी बन रहे हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इन योगों में गणेश चतुर्थी का पूजन करने से पुण्य फल प्राप्त होता है। गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन नहीं करने की भी धार्मिक मान्यता है।
दस दिवसीय गणेशोत्सव का समापन 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन होगा। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन करेंगे। हालांकि, घरों और गणेश मंडलों में परंपरा के अनुसार डेढ़, तीन, पांच, सात या दस दिन बाद भी गणपति विसर्जन किया जाता है।
Updated on:
11 Sept 2026 03:18 pm
Published on:
11 Sept 2026 03:18 pm
