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अहमदाबाद में 89वीं कालीबाड़ी दुर्गा पूजा 15 अक्टूबर से

बीसीए के सचिव अनल मुखर्जी ने बताया कि इस साल मां दुर्गा की मूर्ति बनाने के लिए बंगाल से आए कारीगर जुटे है। दुर्गा पूजा में जाने-माने कलाकार, क्रिएटिव टैलेंट और विशेष कलाकार शामिल होंगे। इस दौरान रोजाना करीब 5 हजार लोग प्रसाद ग्रहण करेंगे। आयोजन स्थल पर फूड कोर्ट, खास क्राफ्ट्स मेला भी लगाया जाएगा। हर शाम विशेष कला प्रस्तुति और सांस्कृतिक गतिविधि भी होगी। म्यूज़िक, डांस, आर्ट और अलग-अलग कल्चरल प्रोग्राम के ज़रिए गैर-बंगाली नागरिकों को भी बंगाली संस्कृति का अनुभव कराया जाएगा।
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89th Kalibari Durga Puja in Ahmedabad Begins October 15

बंगाल कल्चरल एसोसिएशन अहमदाबाद के पदाधिकारी।

बंगाल कल्चरल एसोसिएशन का आयोजन, सिंधु भवन रोड पर मायापुर के इस्कॉन मंदिर से प्रेरित होगी थीम

अहमदाबाद. बंगाल कल्चरल एसोसिएशन (बीसीए)-अहमदाबाद इस साल 89वीं कालीबाड़ी दुर्गा पूजा 15 से 21 अक्टूबर तक शहर के सिंधु भवन रोड पर ऑक्सीजन पार्क के पास मनाएगा।
बीसीए के सचिव अनल मुखर्जी ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि इस साल के आयोजन का मुख्य आकर्षण मायापुर के इस्कॉन मंदिर से प्रेरित थीम के रूप में मंडप होगा। इसमें आध्यात्म, आर्किटेक्चर, क्रिएटिव आर्ट्स और दुर्गा पूजा की फेस्टिव ट्रेडिशन का एक यूनिक संगम देखने को मिलेगा।

मां दुर्गा की मूर्ति बनाने बंगाल से आए कारीगर

बीसीए के सचिव अनल मुखर्जी ने बताया कि इस साल मां दुर्गा की मूर्ति बनाने के लिए बंगाल से आए कारीगर जुटे है। दुर्गा पूजा में जाने-माने कलाकार, क्रिएटिव टैलेंट और विशेष कलाकार शामिल होंगे। इस दौरान रोजाना करीब 5 हजार लोग प्रसाद ग्रहण करेंगे। आयोजन स्थल पर फूड कोर्ट, खास क्राफ्ट्स मेला भी लगाया जाएगा। हर शाम विशेष कला प्रस्तुति और सांस्कृतिक गतिविधि भी होगी। म्यूज़िक, डांस, आर्ट और अलग-अलग कल्चरल प्रोग्राम के ज़रिए गैर-बंगाली नागरिकों को भी बंगाली संस्कृति का अनुभव कराया जाएगा।

पंचमी से विजयादशमी तक होंगे कार्यक्रम

बीसीए के सचिव ने बताया कि दुर्गा पूजा का आयोजन पंचमी से विजयादशमी तक किया जाएगा। 15 अक्टूबर को सुबह पंचमी पूजा से आयोजन आरंभ होगा। 21 अक्टूबर को विजयादशमी पर सिंदूर खेला होगा। साथ ही उसी दिन प्रतिमा विसर्जन किया जाएगा।

बंगाली और गुजराती संस्कृति के बीच पुल

मुखर्जी ने बताया कि एसोसिएशन अहमदाबाद में बंगाली संस्कृति, परंपरा और विरासत को बचाने और लगभग नौ दशकों के अपने सफर में नई पीढ़ी तक पहुंचाने की अपनी कोशिशों को जारी रखे हुए है। इस आयोजन ने अहमदाबाद के अलग-अलग समुदाय के बीच प्यार, भरोसे और कल्चरल कनेक्शन का खूबसूरत पुल भी बनाया है।
बीसीए के सचिव अनल मुखर्जी ने बताया कि बंगाली और गुजराती संस्कृति के बीच यह पुल आस्था, ट्रेडिशन, दोस्ती और कलेक्टिव सेलिब्रेशन को जोड़ता है। शायद यह पुल अपने आप में हावड़ा ब्रिज और अटल ब्रिज जितना ही ज़रूरी है। जैसे एक पुल दो किनारों को जोड़ता है, वैसे ही कालीबाड़ी दुर्गा पूजा दो कल्चरल ट्रेडिशन और कम्युनिटी को करीब लाने का काम करती है।