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Pitru Paksha 2026: 26 सितंबर से शुरू होगा पितृ पक्ष, जानें श्राद्ध से जुड़े नियम और तिथियां

Pitru Paksha 2026 Niyam: पितृ पक्ष 26 सितंबर से शुरू हो रहा है। इन 16 दिनों में पितरों के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध किया जाता है। जानें इसका महत्व और सभी तिथियां।
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भारत

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Akash Dewani

Sep 14, 2026

pitru paksha 2026 shradh tith tarpan pind daan niyam

Pitru Paksha 2026: ज्योतिषाचार्य से जाने पितृ पक्ष से जुड़े नियम (फोटो सोर्स- Gemini AI)

Pitru Paksha 2026 Shradh Tithi: पितृ पक्ष का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। पितृ पक्ष में पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पूजन किया जाता है। पितृ पक्ष में पितरों के प्रति आदर-भाव प्रकट किा जाता है। पितृ पक्ष या श्राद्ध करीब 16 दिनों के होते हैं। ज्योतिषाचार्य डॉ अनीष व्यास ने बताया कि इस बार पितृ पक्ष का आरंभ 26 सितंबर से हो रहा है और 10 अक्तूबर तक चलेगा। देवी-देवताओं के अलावा पितर भी हमारे जीवन के लिए, मंगलकार्यों के लिए बहुत जरूरी हैं।

पितरों की आत्मा और शांति के लिए किया जाता है तर्पण

पितृपक्ष में पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध और तर्पण आदि क्रम किए जाते हैं। पितृ पक्ष के दौरान पितर लोक से पितर धरती लोक पर आते हैं। इसलिए इस दौरान उनके नाम से पूजा पाठ करना उनकी आत्मा को शांति देता है। साथ ही उन्हें मोक्ष मिलता है। पितृपक्ष जिसे श्राद्ध भी कहा जाता है अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए किया जाता है। पितरों की पूजा और तर्पण आदि कार्यों के लिए श्राद्ध पक्ष बहुत ही उत्तम माना जाता है। पितृपक्ष के दौरान हमारे पूर्वज पितृ लोक से धरती लोक पर आते हैं। इसलिए इन दिनों में उनके श्राद्ध, तर्पण, और पिंडदान आदि करने का विधान है। ऐसी मान्यता है कि पितरों का श्राद्ध आदि करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

श्रद्धा पूर्वक अपने पितरों को प्रसन्न करना

श्राद्ध का अर्थ श्रद्धा पूर्वक अपने पितरों को प्रसन्न करने से है। सनातन मान्यता के अनुसार जो परिजन अपना देह त्यागकर चले गए हैं, उनकी आत्मा की तृप्ति के लिए सच्ची श्रद्धा के साथ जो तर्पण किया जाता है, उसे श्राद्ध कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि मृत्यु के देवता यमराज श्राद्ध पक्ष में जीव को मुक्त कर देते हैं, ताकि वे स्वजनों के यहां जाकर तर्पण ग्रहण कर सकें। जिस किसी के परिजन चाहे वह विवाहित हो या अविवाहित हों, बच्चा हो या बुजुर्ग, स्त्री हो या पुरुष उनकी मृत्यु हो चुकी है उन्हें पितर कहा जाता है। पितृपक्ष में मृत्युलोक से पितर पृथ्वी पर आते है और अपने परिवार के लोगों को आशीर्वाद देते हैं। पितृपक्ष में पितरों की आत्मा की शांति के लिए उनको तर्पण किया जाता है। पितरों के प्रसन्न होने पर घर पर सुख शान्ति आती है।

पिंडदान, तर्पण और हवन

पितृपक्ष में हर साल पितरों के निमित्त पिंडदान, तर्पण और हवन आदि किया जाता है। सभी लोग अपने-अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि के अनुसारए उनका श्राद्ध करते हैं। माना जाता है कि जो लोग पितृपक्ष में पितरों का तर्पण नहीं करते उन्हेंक पितृदोष लगता है। श्राद्ध करने से उनकी आत्माे को तृप्ति और शांति मिलती है। वे आप पर प्रसन्न होकर पूरे परि।वार को आशीर्वाद देते हैं। हर साल लोग अपने पितरों की आत्मार की शांति के लिए गया जाकर पिंडदान करते हैं।

नहीं होते हैं मांगलिक कार्य

पितृों के समर्पित इन दिनों में हर दिन उनके लिए खाना निकाला जाता है। इसके साथ ही उनकी तिथि पर बह्मणों को भोज कराया जाता है। इन 15 दिनों में कोई शुभ कार्य जैसे, गृह प्रवेश, कानछेदन, मुंडन, शादी, विवाह नहीं कराए जाते। इसके साथ ही इन दिनों में न कोई नया कपड़ा खरीदा जाता और न ही पहना जाता है। पितृ पक्ष में लोग अपने पितरों के तर्पण के लिए पिंडदान, हवन भी कराते हैं।

दोपहर में करना चाहिए तर्पण-अर्पण

देवी-देवताओं की पूजा-पाठ सुबह और शाम को की जाती है। पितरों के लिए दोपहर का समय होता है. दोपहर में करीब 12:00 बजे श्राद्ध कर्म किया जा सकता है। सुबह नित्यकर्म और स्नान आदि के बाद पितरों का तर्पण करना चाहिए।

श्राद्ध की तिथियां

26 सितंबर - पूर्णिमा श्राद्ध
27 सितंबर - प्रतिपदा श्राद्ध
28 सितंबर - द्वितीया श्राद्ध
29 सितंबर - तृतीया श्राद्ध
30 सितंबर - चतुर्थी श्राद्ध और पंचमी श्राद्ध
1 अक्तूबर - षष्ठी श्राद्ध
2 अक्तूबर - सप्तमी श्राद्ध
3 अक्तूबर - अष्टमी श्राद्ध
4 अक्तूबर - नवमी श्राद्ध
5 अक्तूबर - दशमी श्राद्ध
6 अक्तूबर - एकादशी श्राद्ध
7 अक्तूबर - द्वादशी श्राद्ध
8 अक्तूबर - त्रयोदशी श्राद्ध
9 अक्तूबर - चतुर्दशी श्राद्ध
10 अक्तूबर - सर्व पितृ अमावस्या
11 अक्तूबर - मातामह नान श्राद्ध