
Ganpati Sthapana Muhurat 2026: गणपति बप्पा के पांच अंगों में छिपे सफलता के राज (फोटो सोर्स- Magnific)
Ganpati Sthapana Muhurat 2026: इस बार गणेशोत्सव जेन जी, मिलेनियल्स और जेन अल्फा के लिए पूजा-अर्चना और पंडालो की रौनक से आगे जीवन को नई दिशा देने का अवसर भी बनेगा। तेजी से बदलती दुनिया में एकाग्रता और सही निर्णय लेने की चुनौतियो के बीच युवा भगवान गणेश के स्वरूप से प्रेरणा लेकर उनके जीवन संदेशों को अपनाने का संकल्प ले रहे हैं। गणेशजी के अलग-अलग अंग कुशाग्र बुद्धि, सूक्ष्म अवलोकन, बेहतर संवाद, सक्रियता और संसाधनों के सदुपयोग का संदेश देते हैं।
गणपति का बड़ा और चौड़ा माथा बड़ी सोच और नेतृत्व का प्रतीक माना जाता है। यह संदेश देता है कि परिस्थितियों से आगे सोचे और बुद्धि का बेहतर इस्तेमाल करें।
गणेशजी की छोटी आंखें हर चीज को ध्यान से परखने और सोच समझकर निर्णय लेने का संदेश देती है। इससे गम्भीरता और सूक्ष्म अवलोकन की सीख मिलती है।
गणेशजी को गजकर्ण और सूपकर्ण भी कहा जाता है। उनके बड़े कान सबकी बात सुनने की सीख देते हैं, जबकि विवेक से सही और गलत को अलग करने का संदेश भी देते हैं। जैसे सूप खराब चीजों को छांट देता है, वैसे ही नकारात्मक बातों को मन से दूर रखना चाहिए।
मान्यता है कि परशुराम के फरसे से गणेशजी का एक दांत टूट गया था। उन्होंने उसी टूटे दांत को लेखनी बनाकर महाभारत लिखने में इस्तेमाल किया। यह प्रसंग सीमित संसाधनों के भी बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग की सीख देता है।
गणेशजी की सूंड सक्रियता का प्रतीक मानी जाती है। यह संदेश देती है कि जीवन में आलस्य से बचें और सदैव हर परिस्थिति में सक्रिय रहते हुए समस्याओं का समाधान खोजे।
स्थान शुद्धिकरणः ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) या पूर्व दिशा में चौकी बिछाकर उस पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं।
स्थापनाः मिट्टी के गणेश जी को अक्षत के पुंज पर स्थापित करें।
संकल्प: हाथ में जल व अक्षत लेकर व्रत व पूजन का संकल्प लें।
सामग्री अर्पणः श्रीगणेश को दूर्वा, मोदक, लड्डू, लाल पुष्प, सिंदूर, और जनेऊ अर्पित करें।
मान्यताः शास्त्रों में मिट्टी के(पार्थिव) गणेश जी की पूजा को सर्वोत्तम माना है, क्योंकि मिट्टी पृथ्वी तत्व का प्रतीक है। इसके विसर्जन से पर्यावरण को हानि नहीं पहुंचती।
Updated on:
14 Sept 2026 12:19 pm
Published on:
14 Sept 2026 12:19 pm
