
Sawan Special: सावन के पवित्र महीने में शिवालयों में आस्था का सैलाब उमड़ रहा है। देशभर में कई ऐसे चमत्कारी माने जाने वाले शिवलिंग है जो गुफाओं में स्थापित है। ऐसा ही एक प्राचीन शिवलिंग मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के बदरवास क्षेत्र में है। बदरवास जनपद के ग्राम सालोन के पास स्थित तिलिया भरका की प्राचीन गुफा अपने भीतर एक ऐसा शिवलिंग (Tillia Bharka Cave Shivling) समेटे हुए है, जिसे देखने के लिए श्रद्धालु और ग्रामीण पहुंचते हैं।
पहाड़ी के भीतर करीब 200 फीट गहराई में स्थित इस प्राचीन शिवलिंग पर दिनभर में महज कुछ मिनट के लिए सूर्य की किरणें पहुंचती है। सूर्य की रोशनी पड़ते ही गुफा में शिवलिंग और उसकी छाया का अनोखा दृश्य दिखाई देता है। बताया जाता है कि गुफा के भीतर दोपहर तक काफी अंधेरा रहता है। शाम करीब 4.50 बजे सूर्य की किरणें गुफा के प्राकृतिक रास्ते से होकर सीधे शिवलिंग तक पहुंचती है। कुछ ही देर के इस नजारे में शिवलिंग की परछाई पीछे की चट्टान पर स्पष्ट दिखाई देती है। रोशनी और छाया के इस दृश्य को देखकर वहां मौजूद लोगों में कौतूहल और श्रद्धा का भाव नजर आता है।
इस गुफा की एक और खास बात यहां स्थित शिवलिंग पर लगातार टपकता पानी है। ग्रामीणों के अनुसार पहाड़ी के ऊपर आसपास कोई दिखाई देने वाला जलस्रोत नहीं है, इसके बावजूद गुफा के अंदर शिवलिंग पर बूंद-बूंद पानी गिरता रहता है। श्रद्धालु इसे भगवान शिव की प्राकृतिक जलधारा मानकर आस्था से देखते हैं।
गुफा तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं है। पहाड़ी के बीच संकरे रास्तों के साथ कई स्थानों पर मधुमक्खियों के छत्ते भी दिखाई देते हैं। पत्रिका की टीम जब गुफा तक पहुंची तो अंदर जाने के दौरान इन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। शाम के समय सूर्य की किरणें शिवलिंग पर पड़ने के बाद गुफा के अंदर का दृश्य कुछ देर के लिए साफ दिखाई दिया।
ग्राम भरका के सरपंच मुसाब गुर्जर का कहना है कि यह प्राचीन शिवलिंग और गुफा क्षेत्र लंबे समय से ग्रामीणों की आस्था का केंद्र है। उन्होंने कहा कि यदि पुरातत्व विभाग इस स्थल सर्वे कर इसे चिन्हित और संरक्षित करे तथा गुफा तक पहुंचने के लिए सुरक्षित रास्ता विकसित किया जाए, तो यह क्षेत्र धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यटन का भी आकर्षण बन सकता है।