Ramayana:रामायण का कुंभकरण एक मुख्य पात्र था। उसे लंबी और गहरी नींद के लिए जाना जाता है। मान्यता है कि वह एक तपस्वी राक्षस था। उसने ब्रह्मा जी को अपनी भक्ति से खुश कर दिया था। जानिए पूरी कहानी।
Ramayana:रामायण में राक्षसराज रावण के छोटे भाई कुंभकरण की अहम भूमिका रही है। वह अपने विशाल शरीर और 6 महीने तक सोने की आदत के लिए जाना जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कुंभकरण इतना क्यों सोता था? और इसके पीछे का क्या कारण था? यहां जानते हैं कुंभकरण से जुड़ी कुछ खास बातें।
कुंभकरण राक्षसराज रावण का छोटा भाई था। वह असुरों में सबसे बुद्धिमान और बलशाली माना जाता था। मान्यता है कि कुंभकरण ने रावण के साथ तप किया। जिससे ब्रह्मा जी खुश हुए और उससे वरदान मांगने के कहा। धार्मिक कथाओं के अनुसार ऐसा माना जाता है कि कुंभकरण बहुत चतुर था कि वह अमरता का वरदान मांगना चाहता था। लेकिन जब वह वरदान मांगने के लिए इंद्रासन कहने वाला था। तब सरस्वती जी ने उसकी उसकी मति फेर दी और उसके मुह से निद्रासन निकल गया। माना है कि उसी दिन से कुंभकरण को अमरता के बजाय गहरी नींद का वरदान मिली थी।
ब्रह्मा जी से कुंभकरण इस वरदान को पाकर हर 6 महीने सोने चला जाता और केवल एक दिन के लिए जागता है। इस दौरान वह बहुत अधिक भोजन करता था। रामायण में रावण ने भगवान श्रीराम से युद्ध के लिए कुंभकरण को जगाया था। जिसके बाद कुंभकरण ने रावण से श्रीराम से युद्ध की वजह पूछी तो पता चला कि उसका भाई रावण भगवान राम की अर्धांगिनी का हरण कर लाया है।
कुंभकरण ने रावण से माता सीता को वापस करने के लिए विनय की। लेकिन रावण ने उसकी एक नहीं मानी। इसके बाद कुंभकरण रण में युद्ध करने के लिए गया। जिसके बाद कुंभकरण भगवान श्रीराम के हाथों से मारा गया। भगवान राम के हाथों उसका वध होने की वजह से वह सीधा स्वर्ग में पहुंचा।