घंटों इंतजार के बाद भी नहीं बन सके लोगों के पहचान पत्र विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू परिवारों के लिए आयोजित किया शिविर dholpur. बाड़ी पंचायत समिति परिसर में विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू परिवारों के लिए एक शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य पहचान पत्र, मूल निवास, जाति प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, जन आधार […]
घंटों इंतजार के बाद भी नहीं बन सके लोगों के पहचान पत्र
विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू परिवारों के लिए आयोजित किया शिविर
dholpur. बाड़ी पंचायत समिति परिसर में विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू परिवारों के लिए एक शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य पहचान पत्र, मूल निवास, जाति प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, जन आधार कार्ड और वोटर आईडी जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज बनाना है। हालांकि, अधिकारियों की अनदेखी के कारण लोगों के काम नहीं हो पा रहे हैं, जिससे परेशान परिवारों ने शिविर स्थल पर विरोध भी किया।
डांग क्षेत्र के चंबल किनारे स्थित सेवर गांव से आई बुजुर्ग महिला वैजयंती ने बताया कि उन्हें ग्राम पंचायत सचिव ने शिविर के बारे में जानकारी दी। उन्होंने पहचान पत्र और अन्य कागजात बनवाने की उम्मीद में बड़ी मुश्किल से यात्रा कर पंचायत समिति पहुंचीं। वैजयंती के अनुसार दो घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उनका कोई काम नहीं हुआ और उन्हें बिना काम के ही वापस सेवर लौटना पड़ रहा है।
मत्सुरा ग्राम पंचायत के सण्डपुरा गांव से आए नट समाज के राजू ने भी अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि वह अपने परिवार के सदस्यों के साथ वोटर आईडी और आधार कार्ड बनवाने आए थे। एक घंटे से अधिक इंतजार के बाद भी उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। राजू ने आरोप लगाया कि शिविर में अधिकांश कुर्सियां खाली थीं और जो कर्मचारी मौजूद थे, वे न तो काम कर रहे थे और न ही लोगों को स्पष्ट जवाब दे रहे थे।
ग्रामीण क्षेत्र से आए काला सपेरा ने अपनी परेशानी साझा करते हुए बताया कि वह पहले सांप पकडऩे का काम करते थे, लेकिन सरकार ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया है। अब वे मजदूरी या भीख मांगकर गुजारा करते हैं। उन्होंने बताया कि काम-धंधा छोडक़र और किराए का खर्च उठाकर वे बाड़ी आए थे, लेकिन उन्हें भी निराशा ही हाथ लगी।
इस संबंध में पंचायत समिति के सहायक विकास अधिकारी राजेश शर्मा ने बताया कि आज करुआपुरा, सेवर पाली और सण्डपुरा गांवों के लिए शिविर लगाया गया था। उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ लोगों के आधार कार्ड या पहचान पत्र शायद पूरे कागजात न होने के कारण नहीं बन पाए होंगे, लेकिन कई लोगों के काम सफलतापूर्वक पूरे किए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इससे पहले ग्राम पंचायत स्तर पर भी ऐसे शिविर आयोजित किए गए।