धौलपुर

रेल ट्रेक की मिट्टी का कटाव रोकने में दूब घास की ‘सुरक्षा दीवार’

– धौलपुर-सरमथुरा नई रेलवे लाइन किनारे पर लगाई जा रही दूब घास – करीब2.20 लाख एक्वायर मीटर में लगेगी घास, अभी केवल 30 हजार लगी धौलपुर. धौलपुर-सरमथुरा नवीन रेलवे लाइन पर जोरशोरों से कार्य चल रहा है और सब कुछ ठीक रहा तो इस साल के अंत या फिर साल 2027 में इस ट्रेक पर […]

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- धौलपुर-सरमथुरा नई रेलवे लाइन किनारे पर लगाई जा रही दूब घास

- करीब2.20 लाख एक्वायर मीटर में लगेगी घास, अभी केवल 30 हजार लगी

धौलपुर. धौलपुर-सरमथुरा नवीन रेलवे लाइन पर जोरशोरों से कार्य चल रहा है और सब कुछ ठीक रहा तो इस साल के अंत या फिर साल 2027 में इस ट्रेक पर सरमथुरा स्टेशन तक ट्रेनें दौड़ती हुई नजर आएगी। रेलवे की ओर से ट्रेक बिछाने के साथ ट्रेक की मजबूती पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। धौलपुर से बाड़ी के बीच बन चुके नवीन ट्रेक को जलभराव और बरसात से होने से वाले नुकसान से बचाने के लिए रेलवे प्रशासन ने नया प्रयोग किया है। अब ट्रेक के ढलान वाले हिस्से पर पत्थर के स्थान पर दूब (दुर्वा) घास लगाई जा रही है, जिससे मिट्टी का कटाव रोका जा सके। यह दूब घास ट्रेक की मिट्टी को सुरक्षा प्रदान करने के साथ एक हरियाली भी प्रदान करेगी।

30 हजार स्क्वाटर मीटर में लगी घास

नवीन ट्रेक पर उक्त दूब घास लगाना शुरू हो गया है। धौलपुर से पुराने तांतपुर स्टेशन की तरफ उक्त दूब घास को लगाया जा रहा है। वर्तमान में करीब 30 हजार स्क्वाटर मीटर ट्रेक पर दूब घास लगाई जा चुकी है। रेलवे प्रशासन ने बताया कि नवीन ट्रेक पर करीब 20.20 लाख एक्वायर मीटर में दूब घास लगाई जाएगी। यह घास रेलवे ने आगरा जिले के सिकंदरा क्षेत्र से मंगाई है। रेलवे अधिकारी गौरव ने बताया कि यह घास का आरडीएसओ गाइड लाइन के अनुसार मिट्टी के कटाव को बारिश में रोकने के लिए लगाई जा रही है। इससे पहले यह घास रेलवे ने बीना-कटनी रेलवे की तीसरी लाइन पर लगा चुका है।

बरसात में भारी नुकसान पहुंचा...

नवीन रेलवे ट्रेक समेत धौलपुर शहर में बीते दो साल में भारी बरसात के दौरान अच्छा खासा नुकसान हुआ। इसमें रेलवे ट्रेक से मिट्टी कटाव हुआ। यहां पचगांच चौकी के पास भी रेलवे ट्रेक की मिट्टी बहने के बाद रेलवे ने ट्रेक पर साइड से दूब घास बिछाने का निर्णय लिया।

औषधियां गुण से भरपूर दूब घास

उक्त घास को दूब, दुबड़ा और संस्कृत में दुर्वा समेत अन्य नामों से बोला जाता है। इसको मराठी में पाढरी दूर्वा, काली दूर्वा, गुजराती में धोलाध्रो, नीलाध्रो, मारवाड़ी में ध्रो और अंग्रेजी में कोचग्रास, क्रिपिंग साइनोडन भी बोला जाता है। हिन्दू संस्कारों एवं कर्मकाण्डों में इसका उपयोग होता है। उक्त घास औषधीय गुण भी हैं।

दूब त्रिदोष को हरने वाली एक ऐसी औषधि है जो वात कफ पित्त के समस्त विकारों को नष्ट करते हुए वात-कफ और पित्त को सम करती है। दूब सेवन के साथ यदि कपाल भाति की क्रिया का नियमित यौगिक अभ्यास किया जाए तो शरीर के भीतर के त्रिदोष को नियंत्रित कर देता है। यह दाह शामक, रक्तदोष, मूर्छा, अतिसार, अर्श, रक्त पित्त, प्रदर, गर्भस्राव, गर्भपात, यौन रोगों, मूत्रकृच्छ इत्यादि में विशेष लाभकारी है।

- सरमथुरा-धौलपुर ट्रेक पर दूब घास लगाई जा रही है। करीब ३० हजार एक्वायर मीटर में लग चुकी है, शेष धीरे-धीरे कार्य के बढऩे के साथ लग रही है। इससे पहले बीना-कटनी ट्रेक पर लगाई जा चुकी है। यह बरसात के दिनों में मिट्टी कटाव को रोकेगी और ट्रेक को नुकसान नहीं पहुंचेगा।

- त्रिपाठी, सीपीआरओ, इलाहबाद एनसीआर

Published on:
26 Feb 2026 07:04 pm
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