संचालक बोले: एजेंसी ने प्रतिमाह केवल 8 सिलेंडर उपलब्ध कराने के दिए आदेश अन्नपूर्णा रसोइयों पर सिलेंडरों की आपूर्ति नहीं होने से आ रही परेशानी धौलपुर. राज्य से लेकर शहर में एलपीजी सिलेंडरों की कमी का असर जनता खाना यानी अन्नपूर्णा रसोइयों पर पड़ रहा है। हालात यह हैं कि समय पर सिलेंडर उपलब्ध न […]
संचालक बोले: एजेंसी ने प्रतिमाह केवल 8 सिलेंडर उपलब्ध कराने के दिए आदेश
अन्नपूर्णा रसोइयों पर सिलेंडरों की आपूर्ति नहीं होने से आ रही परेशानी
धौलपुर. राज्य से लेकर शहर में एलपीजी सिलेंडरों की कमी का असर जनता खाना यानी अन्नपूर्णा रसोइयों पर पड़ रहा है। हालात यह हैं कि समय पर सिलेंडर उपलब्ध न होने से संचालकों को भोजन का मेन्यू पूरा करने में परेशानी आ रही है। ऊपर से एजेंसी ने रसोइयों को प्रतिमाह 8 सिलेंडर ही उपलब्ध कराने के आदेश ने समस्या को और बढ़ा दिया है।
ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण खड़ी हुई एलपीजी सिलेंडरों की समस्या से लोगों को राहत नहीं पा रही। सिलेंडर नहीं मिलने से लोग अब भी परेशान हैं। सुबह से ही ऐजेंसियों पर सिलेंडर लेने उपभोक्ताओं की भीड़ लगना कम नहीं हो रही। सिलेंडरों की कमी के असर राजकीय योजनाओं पर भी लगातार पड़ रहा है। शहर में संचालित होने वाली 9 अन्नपूर्णा रसोइयों की भी व्यवस्था सिलेंडर उपलब्ध नहीं होने से गड़बड़ाई हुई है। जैसे-तैसे संचालक सिलेंडरों की जुगाड़ लगा अपना काम चला रहे हैं, लेकिन अब संचालकों के आगे एक नई समस्या एजेंसी ने खड़ी कर दी है। एजेंसी ने सिलेंडरों की कमी को देखते हुए प्रति रसोई को प्रतिमाह 8 ही सिलेंडर उपलब्ध कराने की बात कही है, जबकि रसोई संचालकों का कहना है कि उनके यहां प्रतिमाह 12 से 14 सिलेंडरों की खपत खाना बनाने के लिए होती है, अब जब एजेंसी ने 8 ही सिलेंडर उपलब्ध कराने के आदेश जारी कर समस्या को और बढ़ा दिया है। संचालकों का कहना है कि सिलेंडरों की किल्लत के बीच वैसी ही बड़ी मुश्किलों से काम चल पा रहा है।
चूल्हे पर बनाना पड़ा था भोजन
गैस सिलेंडरों की बढ़ती किल्लत के बीच अन्नपूर्णा रसोइयां भी प्रभावित हुए बिना न रह सकीं। सिलेंडरों की उपलब्धता नहीं होने के कारण कई रसोइयों पर खाना चूल्हे तक पर बनाना पड़ा, तो कई रसोइयों में भोजन के मेन्यू में तक में कटौती करनी पड़ी थी। तो वहीं घंटाघर रोड स्थित लाइब्रेरी के पास संचालित अन्नपूर्णा रसोई में गैस सिलेंडर की कमी के कारण रसोई को कुछ समय के लिए बंद रखना पड़ा। जिससे कि भोजन करने आने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि शासन के हस्तक्षेप के बाद थोड़ी राहत जरूर मिली, लेकिन अभी भी रसोइ संचालक सिलेंडरों की आपूर्ति को लेकर परेशान हैं। उनका कहना है कि 8 सिलेंडरों से कैसे भोजन का मेन्यू तैयार किया जाएगा।
रसोइयों पर 1500 लोग भर रहे अपना पेट
अन्नपूर्णा रसोई योजना सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है। इस योजना को श्रमिक और जरूरतमंदों को ध्यान में रखते हुए प्रारंभ किया गया था। शहर भर में 9 अन्नपूर्णा रसोइयांं संचालित हो रही हैं। प्रत्येक रसोई पर प्रतिदिन 200 लोगों के कूपन काटे जाने की व्यवस्था है। शहर की संचालित इन रसोइयों में प्रतिदिन लगभग 1400 से 1500 लोग अपना पेट भरते हैं। योजना के तहत 8 रुपए में लोगों को सुबह और शाम भोजन उपलब्ध कराया जाता है। भोजन में लोगों को दाल, सूखी सब्जी, चावल, छह रोटी, अचार और पापड़ उपलब्ध कराया जाता है। जानकारी के अनुसार शहर भर में 9 अन्नपूर्णा रसोइयों का संचालन किया जा रहा है, लेकिन सिलेंडरों की कमी के कारण अन्नपूर्णा रसोइयां प्रभावित हो रही हैं, जिससे यहां भोजन करने आने वाले लोगों को भी परेशानियां उठानी पड़ रही हैं।
रसद विभाग और न ही प्रशासन की तरफ से अन्नपूर्णा रसोइयों को प्रतिमाह 8 सिलेंडर उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं। प्रशासन की गाइड लाइन के अनुसार रसोइयों को तीन माह के दौरान व्यय किए सिलेंडरों के औसत के हिसाब से सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएंगे।
-मणि खींची, जिला रसद अधिकारी
अन्नपूर्णा रसोइयों को प्रतिमाह 8 सिलेंडर उपलब्ध कराए जाने का कंपनी की तरफ से कोई ऐसे आदेश नहीं दिए गए हैं। सरकार की गाइड लाइन के अनुसार ही उन्हें सिलेंडर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
- नवीन, एरिया सेल्स मैनेजर हिन्दुस्तान पेट्रोलियम